गीता · ईर्ष्या
कुंडलीपंचांग

ईर्ष्या पर गीता क्या कहती है?

जलन, तुलना, द्वेष

भगवान के प्रिय भक्त के लक्षणों में सबसे पहले “अद्वेष्टा” — किसी से द्वेष न करना — आता है। ये श्लोक जलन और बैर से मुक्त होने की दिशा दिखाते हैं।

9श्लोक
5अध्याय से
गीता 12.13 से 12.14 श्रीकृष्ण

इन दोनों श्लोकों का अर्थ एक साथ दिया गया है

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी ॥ 12.13 ॥
सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः।
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥ 12.14 ॥

हिंदी अर्थसब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र (प्रेमी) और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, निरन्तर सन्तुष्ट, योगी, शरीरको वशमें किये हुए, दृढ़ निश्चयवाला? मेरेमें अर्पित मनबुद्धिवाला जो मेरा भक्त है, वह मेरेको प्रिय है।

रोमन में पढ़ें

adveṣhṭā sarva-bhūtānāṁ maitraḥ karuṇa eva cha
nirmamo nirahankāraḥ sama-duḥkha-sukhaḥ kṣhamī
santuṣhṭaḥ satataṁ yogī yatātmā dṛiḍha-niśhchayaḥ
mayy arpita-mano-buddhir yo mad-bhaktaḥ sa me priyaḥ

अध्याय 12 · भक्तियोग
गीता 12.15 श्रीकृष्ण

यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः।
हर्षामर्षभयोद्वेगैर्मुक्तो यः स च मे प्रियः ॥

हिंदी अर्थजिससे किसी प्राणीको उद्वेग नहीं होता और जिसको खुद भी किसी प्राणीसे उद्वेग नहीं होता तथा जो हर्ष, अमर्ष (ईर्ष्या), भय और उद्वेगसे रहित है, वह मुझे प्रिय है।

रोमन में पढ़ें

yasmān nodvijate loko lokān nodvijate cha yaḥ
harṣhāmarṣha-bhayodvegair mukto yaḥ sa cha me priyaḥ

अध्याय 12 · भक्तियोग
गीता 5.3 श्रीकृष्ण

ज्ञेयः स नित्यसंन्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति।
निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते ॥

हिंदी अर्थहे महाबाहो ! जो मनुष्य न किसीसे द्वेष करता है और न किसीकी आकाङ्क्षा करता है; वह (कर्मयोगी) सदा संन्यासी समझनेयोग्य है; क्योंकि द्वन्द्वोंसे रहित मनुष्य सुखपूर्वक संसार-बन्धनसे मुक्त हो जाता है।

रोमन में पढ़ें

jñeyaḥ sa nitya-sannyāsī yo na dveṣhṭi na kāṅkṣhati
nirdvandvo hi mahā-bāho sukhaṁ bandhāt pramuchyate

अध्याय 5 · कर्मसंन्यासयोग
गीता 11.55 श्रीकृष्ण

मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः।
निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव ॥

हिंदी अर्थहे पाण्डवन ! जो मेरे लिये ही कर्म करनेवाला, मेरे ही परायण और मेरा ही भक्त है तथा सर्वथा आसक्तिरहित और प्राणिमात्रके साथ निर्वैर है, वह भक्त मेरेको प्राप्त होता है।

रोमन में पढ़ें

mat-karma-kṛin mat-paramo mad-bhaktaḥ saṅga-varjitaḥ
nirvairaḥ sarva-bhūteṣhu yaḥ sa mām eti pāṇḍava

अध्याय 11 · विश्वरूपदर्शनयोग
गीता 3.31 श्रीकृष्ण

ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः।
श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः ॥

हिंदी अर्थजो मनुष्य दोष-दृष्टिसे रहित होकर श्रद्धापूर्वक मेरे इस (पूर्वश्लोकमें वर्णित) मतका सदा अनुसरण करते हैं, वे भी कर्मोंके बन्धनसे मुक्त हो जाते हैं।

रोमन में पढ़ें

ye me matam idaṁ nityam anutiṣhṭhanti mānavāḥ
śhraddhāvanto ’nasūyanto muchyante te ’pi karmabhiḥ

अध्याय 3 · कर्मयोग
गीता 3.32 श्रीकृष्ण

ये त्वेतदभ्यसूयन्तो नानुतिष्ठन्ति मे मतम्।
सर्वज्ञानविमूढांस्तान्विद्धि नष्टानचेतसः ॥

हिंदी अर्थपरन्तु जो मनुष्य मेरे इस मतमें दोष-दृष्टि करते हुए इसका अनुष्ठान नहीं करते, उन सम्पूर्ण ज्ञानोंमें मोहित और अविवेकी मनुष्योंको नष्ट हुए ही समझो।

रोमन में पढ़ें

ye tvetad abhyasūyanto nānutiṣhṭhanti me matam
sarva-jñāna-vimūḍhāns tān viddhi naṣhṭān achetasaḥ

अध्याय 3 · कर्मयोग
गीता 16.18 श्रीकृष्ण

अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः।
मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः ॥

हिंदी अर्थवे अहङ्कार, हठ, घमण्ड, कामना और क्रोधका आश्रय लेनेवाले मनुष्य अपने और दूसरोंके शरीरमें रहनेवाले मुझ अन्तर्यामीके साथ द्वेष करते हैं तथा (मेरे और दूसरोंके गुणोंमें) दोष-दृष्टि रखते हैं।

रोमन में पढ़ें

ahankāraṁ balaṁ darpaṁ kāmaṁ krodhaṁ cha sanśhritāḥ
mām ātma-para-deheṣhu pradviṣhanto ’bhyasūyakāḥ

अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग
गीता 16.19 श्रीकृष्ण

तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान्।
क्षिपाम्यजस्रमशुभानासुरीष्वेव योनिषु ॥

हिंदी अर्थउन द्वेष करनेवाले, क्रूर स्वभाववाले और संसारमें महान् नीच, अपवित्र मनुष्योंको मैं बार-बार आसुरी योनियोंमें गिराता ही रहता हूँ।

रोमन में पढ़ें

tān ahaṁ dviṣhataḥ krūrān sansāreṣhu narādhamān
kṣhipāmy ajasram aśhubhān āsurīṣhv eva yoniṣhu

अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग

दूसरे विषय

सभी जीवन-विषय गीता को अपनी परिस्थिति से पढ़ें

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। किस विषय में कौन-से श्लोक हों, यह चयन SachiBhakti का है।