गीता · चिंता
कुंडलीपंचांग

चिंता पर गीता क्या कहती है?

भविष्य, नतीजे, बेचैनी

गीता “चिंता” शब्द को आज की तरह परिभाषित नहीं करती, पर फल की आसक्ति और भगवान पर भरोसे के बारे में बार-बार बात करती है — “मैं तुम्हारा योगक्षेम वहन करता हूँ” (9.22)।

10श्लोक
5अध्याय से
गीता 2.47 श्रीकृष्ण

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥

हिंदी अर्थकर्तव्य-कर्म करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें कभी नहीं। अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति न हो।

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karmaṇy-evādhikāras te mā phaleṣhu kadāchana
mā karma-phala-hetur bhūr mā te saṅgo ’stvakarmaṇi

अध्याय 2 · सांख्ययोग
गीता 9.22 श्रीकृष्ण

अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥

हिंदी अर्थजो अनन्य भक्त मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, मेरेमें निरन्तर लगे हुए उन भक्तोंका योगक्षेम (अप्राप्तकी प्राप्ति और प्राप्तकी रक्षा) मैं वहन करता हूँ।

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ananyāśh chintayanto māṁ ye janāḥ paryupāsate
teṣhāṁ nityābhiyuktānāṁ yoga-kṣhemaṁ vahāmyaham

अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्ययोग
गीता 18.66 श्रीकृष्ण

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥

हिंदी अर्थसम्पूर्ण धर्मोंका आश्रय छोड़कर तू केवल मेरी शरणमें आ जा। मैं तुझे सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर दूँगा, चिन्ता मत कर।

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sarva-dharmān parityajya mām ekaṁ śharaṇaṁ vraja
ahaṁ tvāṁ sarva-pāpebhyo mokṣhayiṣhyāmi mā śhuchaḥ

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता 18.58 श्रीकृष्ण

मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।
अथ चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि ॥

हिंदी अर्थमेरेमें चित्तवाला होकर तू मेरी कृपासे सम्पूर्ण विघ्नोंको तर जायगा और यदि तू अहंकारके कारण मेरी बात नहीं सुनेगा तो तेरा पतन हो जायगा।

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mach-chittaḥ sarva-durgāṇi mat-prasādāt tariṣhyasi
atha chet tvam ahankārān na śhroṣhyasi vinaṅkṣhyasi

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता 2.45 श्रीकृष्ण

त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् ॥

हिंदी अर्थवेद तीनों गुणोंके कार्यका ही वर्णन करनेवाले हैं; हे अर्जुन! तू तीनों गुणोंसे रहित हो जा, निर्द्वन्द्व हो जा, निरन्तर नित्य वस्तु परमात्मा में स्थित हो जा, योगक्षेमकी चाहना भी मत रख और परमात्मपरायण हो जा।

रोमन में पढ़ें

trai-guṇya-viṣhayā vedā nistrai-guṇyo bhavārjuna
nirdvandvo nitya-sattva-stho niryoga-kṣhema ātmavān

अध्याय 2 · सांख्ययोग
गीता 12.12 श्रीकृष्ण

श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते।
ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम् ॥

हिंदी अर्थअभ्याससे शास्त्रज्ञान श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानसे ध्यान श्रेष्ठ है और ध्यानसे भी सब कर्मोंके फलका त्याग श्रेष्ठ है। कर्मफलत्यागसे तत्काल ही परमशान्ति प्राप्त हो जाती है।

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śhreyo hi jñānam abhyāsāj jñānād dhyānaṁ viśhiṣhyate
dhyānāt karma-phala-tyāgas tyāgāch chhāntir anantaram

अध्याय 12 · भक्तियोग
गीता 12.16 श्रीकृष्ण

अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः।
सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः ॥

हिंदी अर्थजो आकाङ्क्षासे रहित, बाहर-भीतरसे पवित्र, दक्ष, उदासीन, व्यथासे रहित और सभी आरम्भोंका अर्थात् नये-नये कर्मोंके आरम्भका सर्वथा त्यागी है, वह मेरा भक्त मुझे प्रिय है।

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anapekṣhaḥ śhuchir dakṣha udāsīno gata-vyathaḥ
sarvārambha-parityāgī yo mad-bhaktaḥ sa me priyaḥ

अध्याय 12 · भक्तियोग
गीता 16.5 श्रीकृष्ण

दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता।
मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ॥

हिंदी अर्थदैवी-सम्पत्ति मुक्तिके लिये और आसुरी-सम्पत्ति बन्धनके लिये है। हे पाण्डव तुम दैवी-सम्पत्तिको प्राप्त हुए हो, इसलिये तुम्हें शोक (चिन्ता) नहीं करना चाहिये।

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daivī sampad vimokṣhāya nibandhāyāsurī matā
mā śhuchaḥ sampadaṁ daivīm abhijāto ’si pāṇḍava

अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग
गीता 16.11 श्रीकृष्ण

चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः।
कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥

हिंदी अर्थवे मृत्युपर्यन्त रहनेवाली अपार चिन्ताओंका आश्रय लेनेवाले, पदार्थोंका संग्रह और उनका भोग करनेमें ही लगे रहनेवाले और 'जो कुछ है, वह इतना ही है' -- ऐसा निश्चय करनेवाले होते हैं।

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chintām aparimeyāṁ cha pralayāntām upāśhritāḥ
kāmopabhoga-paramā etāvad iti niśhchitāḥ

अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग
गीता 18.35 श्रीकृष्ण

यया स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च।
न विमुञ्चति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी ॥

हिंदी अर्थहे पार्थ ! दुष्ट बुद्धिवाला मनुष्य जिस धृतिके द्वारा निद्रा, भय, चिन्ता, दुःख और घमण्डको भी नहीं छोड़ता, वह धृति तामसी है।

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yayā svapnaṁ bhayaṁ śhokaṁ viṣhādaṁ madam eva cha
na vimuñchati durmedhā dhṛitiḥ sā pārtha tāmasī

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग

दूसरे विषय

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हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। किस विषय में कौन-से श्लोक हों, यह चयन SachiBhakti का है।