गीता · अकेलापन
कुंडलीपंचांग

अकेलापन पर गीता क्या कहती है?

तन्हाई, सहारा, अपनापन

गीता कहती है कि परमात्मा सबके हृदय में स्थित हैं और सब प्राणियों के सुहृद् हैं। जो सबमें उन्हें देखता है, उसके लिए वे कभी दूर नहीं होते (6.30)।

10श्लोक
7अध्याय से
गीता 6.30 श्रीकृष्ण

यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति ॥

हिंदी अर्थजो सबमें मुझे देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता।

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yo māṁ paśhyati sarvatra sarvaṁ cha mayi paśhyati
tasyāhaṁ na praṇaśhyāmi sa cha me na praṇaśhyati

अध्याय 6 · ध्यानयोग
गीता 5.29 श्रीकृष्ण

भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम्।
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥

हिंदी अर्थभक्त मुझे सब यज्ञों और तपोंका भोक्ता, सम्पूर्ण लोकोंका महान् ईश्वर तथा सम्पूर्ण प्राणियोंका सुहृद् (स्वार्थरहित दयालु और प्रेमी) जानकर शान्तिको प्राप्त हो जाता है।

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bhoktāraṁ yajña-tapasāṁ sarva-loka-maheśhvaram
suhṛidaṁ sarva-bhūtānāṁ jñātvā māṁ śhāntim ṛichchhati

अध्याय 5 · कर्मसंन्यासयोग
गीता 18.61 श्रीकृष्ण

ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया ॥

हिंदी अर्थहे अर्जुन ! ईश्वर सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें रहता है और अपनी मायासे शरीररूपी यन्त्रपर आरूढ़ हुए सम्पूर्ण प्राणियोंको (उनके स्वभावके अनुसार) भ्रमण कराता रहता है।

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īśhvaraḥ sarva-bhūtānāṁ hṛid-deśhe ‘rjuna tiṣhṭhati
bhrāmayan sarva-bhūtāni yantrārūḍhāni māyayā

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता 15.15 श्रीकृष्ण

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो
मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च।
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो
वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम् ॥

हिंदी अर्थमैं सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें स्थित हूँ। मेरेसे ही स्मृति, ज्ञान और अपोहन (संशय आदि दोषोंका नाश) होता है। सम्पूर्ण वेदोंके द्वारा मैं ही जाननेयोग्य हूँ। वेदोंके तत्त्वका निर्णय करनेवाला और वेदोंको जाननेवाला भी मैं ही हूँ।

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sarvasya chāhaṁ hṛidi sanniviṣhṭo
mattaḥ smṛitir jñānam apohanaṁ cha
vedaiśh cha sarvair aham eva vedyo
vedānta-kṛid veda-vid eva chāham

अध्याय 15 · पुरुषोत्तमयोग
गीता 13.17 श्रीकृष्ण

ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते।
ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ॥

हिंदी अर्थवह परमात्मा सम्पूर्ण ज्योतियोंका भी ज्योति और अज्ञानसे अत्यन्त परे कहा गया है। वह ज्ञानस्वरूप, जाननेयोग्य, ज्ञान(साधन-समुदाय) से प्राप्त करनेयोग्य और सबके हृदयमें विराजमान है।

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jyotiṣhām api taj jyotis tamasaḥ param uchyate
jñānaṁ jñeyaṁ jñāna-gamyaṁ hṛidi sarvasya viṣhṭhitam

अध्याय 13 · क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग
गीता 10.20 श्रीकृष्ण

अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः।
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥

हिंदी अर्थहे नींदको जीतनेवाले अर्जुन ! सम्पूर्ण प्राणियोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें भी मैं ही हूँ और प्राणियोंके अन्तःकरणमें आत्मरूपसे भी मैं ही स्थित हूँ।

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aham ātmā guḍākeśha sarva-bhūtāśhaya-sthitaḥ
aham ādiśh cha madhyaṁ cha bhūtānām anta eva cha

अध्याय 10 · विभूतियोग
गीता 9.16 से 9.18 श्रीकृष्ण

इन 3 श्लोकों का अर्थ एक साथ दिया गया है

अहं क्रतुरहं यज्ञः स्वधाऽहमहमौषधम्।
मंत्रोऽहमहमेवाज्यमहमग्निरहं हुतम् ॥ 9.16 ॥
पिताऽहमस्य जगतो माता धाता पितामहः।
वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक् साम यजुरेव च ॥ 9.17 ॥
गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्।
प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम् ॥ 9.18 ॥

हिंदी अर्थक्रतु मैं हूँ, यज्ञ मैं हूँ, स्वधा मैं हूँ, औषध मैं हूँ, मन्त्र मैं हूँ, घृत मैं हूँ, अग्नि मैं हूँ और हवनरूप क्रिया भी मैं हूँ। जाननेयोग्य पवित्र, ओंकार, ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ। इस सम्पूर्ण जगत्का पिता, धाता, माता, पितामह, गति, भर्ता, प्रभु, साक्षी, निवास, आश्रय, सुहृद्, उत्पत्ति, प्रलय, स्थान, निधान तथा अविनाशी बीज भी मैं ही हूँ।

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ahaṁ kratur ahaṁ yajñaḥ svadhāham aham auṣhadham
mantro ’ham aham evājyam aham agnir ahaṁ hutam
pitāham asya jagato mātā dhātā pitāmahaḥ
vedyaṁ pavitram oṁkāra ṛik sāma yajur eva cha
gatir bhartā prabhuḥ sākṣhī nivāsaḥ śharaṇaṁ suhṛit
prabhavaḥ pralayaḥ sthānaṁ nidhānaṁ bījam avyayam

अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्ययोग
गीता 13.10 श्रीकृष्ण

मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी।
विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि ॥

हिंदी अर्थमेरेमें अनन्ययोगके द्वारा अव्यभिचारिणी भक्तिका होना, एकान्त स्थानमें रहनेका स्वभाव होना और जन-समुदायमें प्रीतिका न होना।

रोमन में पढ़ें

mayi chānanya-yogena bhaktir avyabhichāriṇī
vivikta-deśha-sevitvam aratir jana-sansadi

अध्याय 13 · क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग

दूसरे विषय

सभी जीवन-विषय गीता को अपनी परिस्थिति से पढ़ें

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। किस विषय में कौन-से श्लोक हों, यह चयन SachiBhakti का है।