गीता · आलस्य
कुंडलीपंचांग

आलस्य पर गीता क्या कहती है?

टालमटोल, सुस्ती, नींद

गीता तमोगुण के लक्षणों में प्रमाद, आलस्य और निद्रा गिनाती है, और काम टालने वाले (दीर्घसूत्री) को तामस कर्ता कहती है। साथ ही बताती है कि कर्म न करने से कर्म करना श्रेष्ठ है।

9श्लोक
3अध्याय से
गीता 3.8 श्रीकृष्ण

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।
शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः ॥

हिंदी अर्थतू शास्त्रविधिसे नियत किये हुए कर्तव्य-कर्म कर; क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करनेसे तेरा शरीर-निर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा।

रोमन में पढ़ें

niyataṁ kuru karma tvaṁ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ
śharīra-yātrāpi cha te na prasiddhyed akarmaṇaḥ

अध्याय 3 · कर्मयोग
गीता 18.28 श्रीकृष्ण

अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः।
विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते ॥

हिंदी अर्थजो कर्ता असावधान, अशिक्षित, ऐंठ-अकड़वाला, जिद्दी, उपकारीका अपकार करनेवाला, आलसी, विषादी और दीर्घसूत्री है, वह तामस कहा जाता है।

रोमन में पढ़ें

ayuktaḥ prākṛitaḥ stabdhaḥ śhaṭho naiṣhkṛitiko ‘lasaḥ
viṣhādī dīrgha-sūtrī cha kartā tāmasa uchyate

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता 14.8 श्रीकृष्ण

तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्।
प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ॥

हिंदी अर्थहे भरतवंशी अर्जुन ! सम्पूर्ण देहधारियोंको मोहित करनेवाले तमोगुणको तुम अज्ञानसे उत्पन्न होनेवाला समझो। वह प्रमाद, आलस्य और निद्राके द्वारा देहधारियोंको बाँधता है।

रोमन में पढ़ें

tamas tv ajñāna-jaṁ viddhi mohanaṁ sarva-dehinām
pramādālasya-nidrābhis tan nibadhnāti bhārata

अध्याय 14 · गुणत्रयविभागयोग
गीता 14.13 श्रीकृष्ण

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च।
तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥

हिंदी अर्थहे कुरुनन्दन ! तमोगुणके बढ़नेपर अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह -- ये वृत्तियाँ भी पैदा होती हैं।

रोमन में पढ़ें

aprakāśho ’pravṛittiśh cha pramādo moha eva cha
tamasy etāni jāyante vivṛiddhe kuru-nandana

अध्याय 14 · गुणत्रयविभागयोग
गीता 14.9 श्रीकृष्ण

सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत।
ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जयत्युत ॥

हिंदी अर्थहे भरतवंशोद्भव अर्जुन ! सत्त्वगुण सुखमें और रजोगुण कर्ममें लगाकर मनुष्यपर विजय करता है तथा तमोगुण ज्ञानको ढककर एवं प्रमादमें भी लगाकर मनुष्यपर विजंय करता है।

रोमन में पढ़ें

sattvaṁ sukhe sañjayati rajaḥ karmaṇi bhārata
jñānam āvṛitya tu tamaḥ pramāde sañjayaty uta

अध्याय 14 · गुणत्रयविभागयोग
गीता 18.39 श्रीकृष्ण

यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः।
निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम् ॥

हिंदी अर्थनिद्रा, आलस्य और प्रमादसे उत्पन्न होनेवाला जो सुख आरम्भमें और परिणाममें अपनेको मोहित करनेवाला है, वह सुख तामस कहा गया है।

रोमन में पढ़ें

yad agre chānubandhe cha sukhaṁ mohanam ātmanaḥ
nidrālasya-pramādotthaṁ tat tāmasam udāhṛitam

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता 18.7 श्रीकृष्ण

नियतस्य तु संन्यासः कर्मणो नोपपद्यते।
मोहात्तस्य परित्यागस्तामसः परिकीर्तितः ॥

हिंदी अर्थनियत कर्मका तो त्याग करना उचित नहीं है। उसका मोहपूर्वक त्याग करना तामस कहा गया है।

रोमन में पढ़ें

niyatasya tu sannyāsaḥ karmaṇo nopapadyate
mohāt tasya parityāgas tāmasaḥ parikīrtitaḥ

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता 18.8 श्रीकृष्ण

दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत्।
स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत् ॥

हिंदी अर्थजो कुछ कर्म है, वह दुःखरूप ही है -- ऐसा समझकर कोई शारीरिक क्लेशके भयसे उसका त्याग कर दे, तो वह राजस त्याग करके भी त्यागके फलको नहीं पाता।

रोमन में पढ़ें

duḥkham ity eva yat karma kāya-kleśha-bhayāt tyajet
sa kṛitvā rājasaṁ tyāgaṁ naiva tyāga-phalaṁ labhet

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता 18.25 श्रीकृष्ण

अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्।
मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते ॥

हिंदी अर्थजो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है।

रोमन में पढ़ें

anubandhaṁ kṣhayaṁ hinsām anapekṣhya cha pauruṣham
mohād ārabhyate karma yat tat tāmasam uchyate

अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग

दूसरे विषय

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हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। किस विषय में कौन-से श्लोक हों, यह चयन SachiBhakti का है।