अर्जुन ने पूछा था — मनुष्य न चाहते हुए भी गलत काम क्यों कर बैठता है? उत्तर में गीता कामना (इच्छा) को पहचानती है और इन्द्रियों को वश में करने का रास्ता बताती है।
हिंदी अर्थइन्द्रियाँ, मन और बुद्धि इस कामके वास-स्थान कहे गये हैं। यह काम इन- (इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि-) के द्वारा ज्ञानको ढककर देहाभिमानी मनुष्यको मोहित करता है।
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indriyāṇi mano buddhir asyādhiṣhṭhānam uchyate
etair vimohayatyeṣha jñānam āvṛitya dehinam
हिंदी अर्थइसलिये हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! तू सबसे पहले इन्द्रियोंको वशमें करके इस ज्ञान और विज्ञानका नाश करनेवाले महान् पापी कामको अवश्य ही बलपूर्वक मार डाल।
हिंदी अर्थइन्द्रियोंको (स्थूलशरीरसे) पर (श्रेष्ठ, सबल, प्रकाशक, व्यापक तथा सूक्ष्म) कहते हैं। इन्द्रियोंसे पर मन है, मनसे भी पर बुद्धि है औऱ जो बुद्धिसे भी पर है, वह (काम) है। इस तरह बुद्धिसे पर - (काम-) को जानकर अपने द्वारा अपने-आपको वशमें करके हे महाबाहो ! तू इस कामरूप दुर्जय शत्रुको मार डाल।
रोमन में पढ़ें
indriyāṇi parāṇyāhur indriyebhyaḥ paraṁ manaḥ
manasas tu parā buddhir yo buddheḥ paratas tu saḥ
evaṁ buddheḥ paraṁ buddhvā sanstabhyātmānam ātmanā
jahi śhatruṁ mahā-bāho kāma-rūpaṁ durāsadam
हिंदी अर्थजिस तरह कछुआ अपने अङ्गोंको सब ओरसे समेट लेता है, ऐसे ही जिस कालमें यह कर्मयोगी इन्द्रियोंके विषयोंसे इन्द्रियोंको सब प्रकारसे समेट लेता (हटा लेता) है, तब उसकी बुद्धि प्रतिष्ठित हो जाती है।
हिंदी अर्थनिराहारी (इन्द्रियोंको विषयोंसे हटानेवाले) मनुष्यके भी विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, पर रस निवृत्त नहीं होता। परन्तु इस स्थितप्रज्ञ मनुष्यका तो रस भी परमात्मतत्त्वका अनुभव होनेसे निवृत्त हो जाता है।
हिंदी अर्थजो कर्मेन्द्रियों- (सम्पूर्ण इन्द्रियों-) को हठपूर्वक रोककर मनसे इन्द्रियोंके विषयोंका चिन्तन करता रहता है, वह मूढ़ बुद्धिवाला मनुष्य मिथ्याचारी (मिथ्या आचरण करनेवाला) कहा जाता है।
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karmendriyāṇi sanyamya ya āste manasā smaran
indriyārthān vimūḍhātmā mithyāchāraḥ sa uchyate
गीता 5.22श्रीकृष्ण
ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते।
आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥
हिंदी अर्थक्योंकि हे कुन्तीनन्दन ! जो इन्द्रियों और विषयोंके संयोगसे पैदा होनेवाले भोग (सुख) हैं, वे आदि-अन्तवाले और दुःखके ही कारण हैं। अतः विवेकशील मनुष्य उनमें रमण नहीं करता।
रोमन में पढ़ें
ye hi sansparśha-jā bhogā duḥkha-yonaya eva te
ādyantavantaḥ kaunteya na teṣhu ramate budhaḥ