जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · मन और सोच

“दो रास्ते सामने हैं, सही फ़ैसला कैसे पहचानूँ?”

गीता का छोटा जवाब

गीता “सात्त्विक बुद्धि” की पहचान बताती है — जो जानती है कि क्या करना है और क्या नहीं, किससे डरना है और किससे नहीं। फ़ैसले का आधार अपना धर्म हो, किसी जानकार से पूछें, फिर शांत मन से खुद चुनें।

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. साफ़ बुद्धि की पहचान

    सात्त्विक बुद्धि कर्तव्य-अकर्तव्य, भय-अभय, बंधन-मुक्ति को ठीक-ठीक पहचानती है।

    गीता 18.30 श्रीकृष्ण

    प्रवृत्तिं च निवृत्तिं च कार्याकार्ये भयाभये।
    बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी ॥

    हिंदी अर्थहे पृथानन्दन ! जो बुद्धि प्रवृत्ति और निवृत्तिको, कर्तव्य और अकर्तव्यको, भय और अभयको तथा बन्धन और मोक्षको जानती है, वह बुद्धि सात्त्विकी है।

    रोमन में पढ़ें

    pravṛittiṁ cha nivṛittiṁ cha kāryākārye bhayābhaye
    bandhaṁ mokṣhaṁ cha yā vetti buddhiḥ sā pārtha sāttvikī

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
  2. धर्म को आधार बनाइए

    दूसरे की राह नहीं, अपनी राह — अपना धर्म — फ़ैसले की कसौटी है।

    गीता 3.35 श्रीकृष्ण

    श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
    स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥

    हिंदी अर्थअच्छी तरह आचरणमें लाये हुए दूसरेके धर्मसे गुणोंकी कमीवाला अपना धर्म श्रेष्ठ है। अपने धर्ममें तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरेका धर्म भयको देनेवाला है।

    रोमन में पढ़ें

    śhreyān swa-dharmo viguṇaḥ para-dharmāt sv-anuṣhṭhitāt
    swa-dharme nidhanaṁ śhreyaḥ para-dharmo bhayāvahaḥ

    अध्याय 3 · कर्मयोग
  3. जानकार से पूछिए

    विनम्रता से, सवाल पूछकर और सेवा से जानकार लोगों से ज्ञान लीजिए।

    गीता 4.34 श्रीकृष्ण

    तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
    उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥

    हिंदी अर्थउस- (तत्त्वज्ञान-) को (तत्त्वदर्शी ज्ञानी महापुरुषोंके पास जाकर) समझ। उनको साष्टाङ्ग दण्डवत् प्रणाम करनेसे, उनकी सेवा करनेसे और सरलतापूर्वक प्रश्न करनेसे वे तत्त्वदर्शी ज्ञानी महापुरुष तुझे उस तत्त्वज्ञानका उपदेश देंगे।

    रोमन में पढ़ें

    tad viddhi praṇipātena paripraśhnena sevayā
    upadekṣhyanti te jñānaṁ jñāninas tattva-darśhinaḥ

    अध्याय 4 · ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
  4. फिर फ़ैसला आपका

    कृष्ण ने भी सब समझाकर कहा — अच्छी तरह विचार करके जैसा चाहो, वैसा करो।

    गीता 18.63 श्रीकृष्ण

    इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।
    विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु ॥

    हिंदी अर्थयह गुह्यसे भी गुह्यतर (शरणागतिरूप) ज्ञान मैंने तुझे कह दिया। अब तू इसपर अच्छी तरहसे विचार करके जैसा चाहता है, वैसा कर।

    रोमन में पढ़ें

    iti te jñānam ākhyātaṁ guhyād guhyataraṁ mayā
    vimṛiśhyaitad aśheṣheṇa yathechchhasi tathā kuru

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि कोई और आपके लिए फ़ैसला करे, न यह कि डर के कारण फ़ैसला टालते रहें।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।