जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · मन और सोच

“मुझे लगता है मैं किसी काम का नहीं हूँ — यह भावना कैसे जाए?”

गीता का छोटा जवाब

गीता कहती है कि मन कभी सबसे अच्छा दोस्त होता है, कभी सबसे बड़ा दुश्मन — “मैं बेकार हूँ” वाली आवाज़ उसी दुश्मन की है, सच की नहीं। आप भगवान के अंश हैं, और अच्छाई की ओर उठाया छोटा कदम भी कभी व्यर्थ नहीं जाता।

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. यह आवाज़ सच नहीं

    मनुष्य खुद ही अपना मित्र है और खुद ही अपना शत्रु। जो मन को नहीं जीत पाया, उसके लिए मन ही शत्रु की तरह बर्ताव करता है — यह आवाज़ वही है।

    गीता 6.5 श्रीकृष्ण

    उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
    आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

    हिंदी अर्थअपने द्वारा अपना उद्धार करे, अपना पतन न करे; क्योंकि आप ही अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है।

    रोमन में पढ़ें

    uddhared ātmanātmānaṁ nātmānam avasādayet
    ātmaiva hyātmano bandhur ātmaiva ripur ātmanaḥ

    अध्याय 6 · ध्यानयोग
    गीता 6.6 श्रीकृष्ण

    बन्धुरात्माऽऽत्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः।
    अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥

    हिंदी अर्थजिसने अपने-आपसे अपने-आपको जीत लिया है, उसके लिये आप ही अपना बन्धु है और जिसने अपने-आपको नहीं जीता है, ऐसे अनात्माका आत्मा ही शत्रुतामें शत्रुकी तरह बर्ताव करता है।

    रोमन में पढ़ें

    bandhur ātmātmanas tasya yenātmaivātmanā jitaḥ
    anātmanas tu śhatrutve vartetātmaiva śhatru-vat

    अध्याय 6 · ध्यानयोग
  2. आप कौन हैं

    हर जीव भगवान का सनातन अंश है, और भगवान सब प्राणियों के हृदय में आत्मा बनकर स्थित हैं। जो उनका अंश है, वह बेकार कैसे हो सकता है?

    गीता 15.7 श्रीकृष्ण

    ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।
    मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति ॥

    हिंदी अर्थइस संसारमें जीव बना हुआ आत्मा मेरा ही सनातन अंश है; परन्तु वह प्रकृतिमें स्थित मन और पाँचों इन्द्रियोंको आकर्षित करता है (अपना मान लेता है)।

    रोमन में पढ़ें

    mamaivānśho jīva-loke jīva-bhūtaḥ sanātanaḥ
    manaḥ-ṣhaṣhṭhānīndriyāṇi prakṛiti-sthāni karṣhati

    अध्याय 15 · पुरुषोत्तमयोग
    गीता 10.20 श्रीकृष्ण

    अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः।
    अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥

    हिंदी अर्थहे नींदको जीतनेवाले अर्जुन ! सम्पूर्ण प्राणियोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें भी मैं ही हूँ और प्राणियोंके अन्तःकरणमें आत्मरूपसे भी मैं ही स्थित हूँ।

    रोमन में पढ़ें

    aham ātmā guḍākeśha sarva-bhūtāśhaya-sthitaḥ
    aham ādiśh cha madhyaṁ cha bhūtānām anta eva cha

    अध्याय 10 · विभूतियोग
  3. आपके गुण भी उन्हीं की ज्योति हैं

    जो कुछ भी सुंदर, अच्छा या शक्तिशाली है, वह भगवान के तेज का अंश है। आपमें जो भी अच्छा है — धैर्य, दया, मेहनत — वह भी उसी का हिस्सा है।

    गीता 10.41 श्रीकृष्ण

    यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा।
    तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसंभवम् ॥

    हिंदी अर्थजो-जो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उस-उसको तुम मेरे ही तेज-(योग-) के अंशसे उत्पन्न हुई समझो।

    रोमन में पढ़ें

    yad yad vibhūtimat sattvaṁ śhrīmad ūrjitam eva vā
    tat tad evāvagachchha tvaṁ mama tejo ’nśha-sambhavam

    अध्याय 10 · विभूतियोग
  4. छोटा कदम भी व्यर्थ नहीं

    अच्छे मार्ग पर किया थोड़ा-सा प्रयास भी कभी नष्ट नहीं होता और बड़े भय से रक्षा करता है। आज एक छोटा काम पूरा कीजिए — बस इतना।

    गीता 2.40 श्रीकृष्ण

    नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
    स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥

    हिंदी अर्थमनुष्यलोकमें इस समबुद्धिरूप धर्मके आरम्भका नाश नहीं होता, इसके अनुष्ठानका उलटा फल भी नहीं होता और इसका थोड़ासा भी अनुष्ठान (जन्म-मरणरूप) महान् भयसे रक्षा कर लेता है।

    रोमन में पढ़ें

    nehābhikrama-nāśho ’sti pratyavāyo na vidyate
    svalpam apyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि यह भावना अकेले सहो। अगर मन में खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ, तो तुरंत किसी अपने से बात करें या Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर मुफ़्त कॉल करें।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।