“मुझे लगता है मैं किसी काम का नहीं हूँ — यह भावना कैसे जाए?”
गीता का छोटा जवाब
गीता कहती है कि मन कभी सबसे अच्छा दोस्त होता है, कभी सबसे बड़ा दुश्मन — “मैं बेकार हूँ” वाली आवाज़ उसी दुश्मन की है, सच की नहीं। आप भगवान के अंश हैं, और अच्छाई की ओर उठाया छोटा कदम भी कभी व्यर्थ नहीं जाता।
जवाब, कदम-दर-कदम
हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है
1
यह आवाज़ सच नहीं
मनुष्य खुद ही अपना मित्र है और खुद ही अपना शत्रु। जो मन को नहीं जीत पाया, उसके लिए मन ही शत्रु की तरह बर्ताव करता है — यह आवाज़ वही है।
हिंदी अर्थजिसने अपने-आपसे अपने-आपको जीत लिया है, उसके लिये आप ही अपना बन्धु है और जिसने अपने-आपको नहीं जीता है, ऐसे अनात्माका आत्मा ही शत्रुतामें शत्रुकी तरह बर्ताव करता है।
रोमन में पढ़ें
bandhur ātmātmanas tasya yenātmaivātmanā jitaḥ
anātmanas tu śhatrutve vartetātmaiva śhatru-vat
2
आप कौन हैं
हर जीव भगवान का सनातन अंश है, और भगवान सब प्राणियों के हृदय में आत्मा बनकर स्थित हैं। जो उनका अंश है, वह बेकार कैसे हो सकता है?
अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः।
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥
हिंदी अर्थहे नींदको जीतनेवाले अर्जुन ! सम्पूर्ण प्राणियोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें भी मैं ही हूँ और प्राणियोंके अन्तःकरणमें आत्मरूपसे भी मैं ही स्थित हूँ।
रोमन में पढ़ें
aham ātmā guḍākeśha sarva-bhūtāśhaya-sthitaḥ
aham ādiśh cha madhyaṁ cha bhūtānām anta eva cha
3
आपके गुण भी उन्हीं की ज्योति हैं
जो कुछ भी सुंदर, अच्छा या शक्तिशाली है, वह भगवान के तेज का अंश है। आपमें जो भी अच्छा है — धैर्य, दया, मेहनत — वह भी उसी का हिस्सा है।
हिंदी अर्थजो-जो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उस-उसको तुम मेरे ही तेज-(योग-) के अंशसे उत्पन्न हुई समझो।
रोमन में पढ़ें
yad yad vibhūtimat sattvaṁ śhrīmad ūrjitam eva vā
tat tad evāvagachchha tvaṁ mama tejo ’nśha-sambhavam
4
छोटा कदम भी व्यर्थ नहीं
अच्छे मार्ग पर किया थोड़ा-सा प्रयास भी कभी नष्ट नहीं होता और बड़े भय से रक्षा करता है। आज एक छोटा काम पूरा कीजिए — बस इतना।
गीता 2.40श्रीकृष्ण
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥
हिंदी अर्थमनुष्यलोकमें इस समबुद्धिरूप धर्मके आरम्भका नाश नहीं होता, इसके अनुष्ठानका उलटा फल भी नहीं होता और इसका थोड़ासा भी अनुष्ठान (जन्म-मरणरूप) महान् भयसे रक्षा कर लेता है।
गीता यह नहीं कहती कि यह भावना अकेले सहो। अगर मन में खुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ, तो तुरंत किसी अपने से बात करें या Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर मुफ़्त कॉल करें।