“शादी में देर हो रही है, घर वाले और रिश्तेदार ताने देते हैं — मन कैसे संभालूँ?”
गीता का छोटा जवाब
गीता कहती है कि मान-अपमान में जो शांत रहता है, भगवान उसके पास हैं। आपकी कीमत शादी की तारीख़ से तय नहीं होती — आप भगवान के अंश हैं। अपनी ओर से कोशिश करें और बाक़ी उन पर छोड़ें।
जवाब, कदम-दर-कदम
हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है
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ताने चुभते हैं — यह स्वाभाविक है
गीता मान-अपमान को भी सर्दी-गर्मी की तरह गिनती है। जिसने अपने मन को जीत लिया, वह इनके बीच भी शांत रहता है — और भगवान उसे सदा प्राप्त हैं।
गीता 6.7श्रीकृष्ण
जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः।
शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥
हिंदी अर्थजिसने अपने-आपपर अपनी विजय कर ली है, उस शीत-उष्ण (अनुकूलता-प्रतिकूलता) सुख-दुःख तथा मान-अपमानमें निर्विकार मनुष्यको परमात्मा नित्यप्राप्त हैं।
हिंदी अर्थहे धनञ्जय ! तू आसक्तिका त्याग करके सिद्धि-असिद्धिमें सम होकर योगमें स्थित हुआ कर्मोंको कर; क्योंकि समत्व ही योग कहा जाता है।
रोमन में पढ़ें
yoga-sthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā dhanañjaya
siddhy-asiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṁ yoga uchyate
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भरोसा रखें
जो भक्त भगवान का चिंतन करते हुए उन्हें भजते हैं, उनका योगक्षेम — जो नहीं मिला उसे देना और जो है उसकी रक्षा करना — भगवान स्वयं उठाते हैं।
गीता 9.22श्रीकृष्ण
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥
हिंदी अर्थजो अनन्य भक्त मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, मेरेमें निरन्तर लगे हुए उन भक्तोंका योगक्षेम (अप्राप्तकी प्राप्ति और प्राप्तकी रक्षा) मैं वहन करता हूँ।
रोमन में पढ़ें
ananyāśh chintayanto māṁ ye janāḥ paryupāsate
teṣhāṁ nityābhiyuktānāṁ yoga-kṣhemaṁ vahāmyaham
✋ गीता यह नहीं कहती
गीता यह नहीं कहती कि शादी में देर किसी पाप या दोष की सज़ा है, न यह कि शादी की इच्छा रखना गलत है।