जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · लोग और रिश्ते

“शादी में देर हो रही है, घर वाले और रिश्तेदार ताने देते हैं — मन कैसे संभालूँ?”

गीता का छोटा जवाब

गीता कहती है कि मान-अपमान में जो शांत रहता है, भगवान उसके पास हैं। आपकी कीमत शादी की तारीख़ से तय नहीं होती — आप भगवान के अंश हैं। अपनी ओर से कोशिश करें और बाक़ी उन पर छोड़ें।

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. ताने चुभते हैं — यह स्वाभाविक है

    गीता मान-अपमान को भी सर्दी-गर्मी की तरह गिनती है। जिसने अपने मन को जीत लिया, वह इनके बीच भी शांत रहता है — और भगवान उसे सदा प्राप्त हैं।

    गीता 6.7 श्रीकृष्ण

    जितात्मनः प्रशान्तस्य परमात्मा समाहितः।
    शीतोष्णसुखदुःखेषु तथा मानापमानयोः ॥

    हिंदी अर्थजिसने अपने-आपपर अपनी विजय कर ली है, उस शीत-उष्ण (अनुकूलता-प्रतिकूलता) सुख-दुःख तथा मान-अपमानमें निर्विकार मनुष्यको परमात्मा नित्यप्राप्त हैं।

    रोमन में पढ़ें

    jitātmanaḥ praśhāntasya paramātmā samāhitaḥ
    śhītoṣhṇa-sukha-duḥkheṣhu tathā mānāpamānayoḥ

    अध्याय 6 · ध्यानयोग
  2. आपकी कीमत कौन तय करता है

    इस संसार में हर जीव भगवान का ही सनातन अंश है। किसी की उम्र, शादी या रिश्तेदारों की राय से यह सच नहीं बदलता।

    गीता 15.7 श्रीकृष्ण

    ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।
    मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति ॥

    हिंदी अर्थइस संसारमें जीव बना हुआ आत्मा मेरा ही सनातन अंश है; परन्तु वह प्रकृतिमें स्थित मन और पाँचों इन्द्रियोंको आकर्षित करता है (अपना मान लेता है)।

    रोमन में पढ़ें

    mamaivānśho jīva-loke jīva-bhūtaḥ sanātanaḥ
    manaḥ-ṣhaṣhṭhānīndriyāṇi prakṛiti-sthāni karṣhati

    अध्याय 15 · पुरुषोत्तमयोग
  3. कोशिश करें, पर मन को बाँधें नहीं

    आसक्ति छोड़कर, सफलता-असफलता में सम रहकर कर्म करो — इसी समता को योग कहा गया है। सही रिश्ते की तलाश जारी रखें, पर हर दिन को इसी चिंता में न गँवाएँ।

    गीता 2.48 श्रीकृष्ण

    योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
    सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥

    हिंदी अर्थहे धनञ्जय ! तू आसक्तिका त्याग करके सिद्धि-असिद्धिमें सम होकर योगमें स्थित हुआ कर्मोंको कर; क्योंकि समत्व ही योग कहा जाता है।

    रोमन में पढ़ें

    yoga-sthaḥ kuru karmāṇi saṅgaṁ tyaktvā dhanañjaya
    siddhy-asiddhyoḥ samo bhūtvā samatvaṁ yoga uchyate

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  4. भरोसा रखें

    जो भक्त भगवान का चिंतन करते हुए उन्हें भजते हैं, उनका योगक्षेम — जो नहीं मिला उसे देना और जो है उसकी रक्षा करना — भगवान स्वयं उठाते हैं।

    गीता 9.22 श्रीकृष्ण

    अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
    तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥

    हिंदी अर्थजो अनन्य भक्त मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, मेरेमें निरन्तर लगे हुए उन भक्तोंका योगक्षेम (अप्राप्तकी प्राप्ति और प्राप्तकी रक्षा) मैं वहन करता हूँ।

    रोमन में पढ़ें

    ananyāśh chintayanto māṁ ye janāḥ paryupāsate
    teṣhāṁ nityābhiyuktānāṁ yoga-kṣhemaṁ vahāmyaham

    अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्ययोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि शादी में देर किसी पाप या दोष की सज़ा है, न यह कि शादी की इच्छा रखना गलत है।

यह जवाब अपनों को भेजें

इसी तरह के और सवाल

सभी जीवन के सवाल कर्म, मन, दुख, रिश्ते, भगवान — गीता के जवाब

जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।