गीता कहती है कि भगवान हर प्राणी के हृदय में रहते हैं — आप भीतर से कभी अकेले नहीं। आप उसी के सनातन अंश हैं; जो भीतर इस रिश्ते को पहचान लेता है, उसका अकेलापन साथ में बदल जाता है।
हिंदी अर्थहे अर्जुन ! ईश्वर सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें रहता है और अपनी मायासे शरीररूपी यन्त्रपर आरूढ़ हुए सम्पूर्ण प्राणियोंको (उनके स्वभावके अनुसार) भ्रमण कराता रहता है।
भगवान सबके प्रति सम हैं, पर जो प्रेम से उन्हें भजते हैं, वे उनमें हैं और वे उनमें।
गीता 9.29श्रीकृष्ण
समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः।
ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम् ॥
हिंदी अर्थमैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ। उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है। परन्तु जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मेरेमें हैं और मैं उनमें हूँ।
रोमन में पढ़ें
samo ’haṁ sarva-bhūteṣhu na me dveṣhyo ’sti na priyaḥ
ye bhajanti tu māṁ bhaktyā mayi te teṣhu chāpyaham
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भीतर का सुख
जिसका सुख भीतर है, जो भीतर ही रमता है और भीतर ही प्रकाश पाता है — वह शांति पाता है।
गीता 5.24श्रीकृष्ण
योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः।
स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥
हिंदी अर्थजो मनुष्य केवल परमात्मामें सुखवाला है और केवल परमात्मामें रमण करनेवाला है तथा जो केवल परमात्मामें ज्ञानवाला है, वह ब्रह्ममें अपनी स्थितिका अनुभव करनेवाला सांख्ययोगी निर्वाण ब्रह्मको प्राप्त होता है।
रोमन में पढ़ें
yo 'ntaḥ-sukho 'ntar-ārāmas tathāntar-jyotir eva yaḥ
sa yogī brahma-nirvāṇaṁ brahma-bhūto 'dhigachchhati
✋ गीता यह नहीं कहती
गीता यह नहीं कहती कि लोगों से दूर हो जाइए या अकेलेपन को चुपचाप सहते रहिए। अपनों से बात करना और मदद लेना भी ज़रूरी है।