जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · भगवान और पूजा

“अगर भगवान हैं, तो दिखते क्यों नहीं?”

गीता का छोटा जवाब

गीता कहती है कि भगवान अपनी योगमाया से ढके रहते हैं, इसलिए इन आँखों से सबको नहीं दिखते। पर वे हर जगह पहचाने जा सकते हैं — जल के स्वाद में, सूर्य-चंद्र के प्रकाश में, हर विशेष चीज़ में।

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. क्यों नहीं दिखते

    मैं अपनी योगमाया से ढका रहने के कारण सबके सामने प्रकट नहीं होता।

    गीता 7.25 श्रीकृष्ण

    नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः।
    मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ॥

    हिंदी अर्थजो मूढ़ मनुष्य मेरेको अज और अविनाशी ठीक तरहसे नहीं जानते (मानते), उन सबके सामने योगमायासे अच्छी तरहसे आवृत हुआ मैं प्रकट नहीं होता।

    रोमन में पढ़ें

    nāhaṁ prakāśhaḥ sarvasya yoga-māyā-samāvṛitaḥ
    mūḍho ’yaṁ nābhijānāti loko mām ajam avyayam

    अध्याय 7 · ज्ञानविज्ञानयोग
  2. फिर भी हर जगह हैं

    जल में स्वाद, सूर्य-चंद्र में प्रकाश, पृथ्वी में सुगंध, तपस्वियों में तप — मैं यह सब हूँ।

    गीता 7.8 श्रीकृष्ण

    रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः।
    प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु ॥

    हिंदी अर्थहे कुन्तीनन्दन ! जलोंमें रस मैं हूँ, चन्द्रमा और सूर्यमें प्रभा (प्रकाश) मैं हूँ, सम्पूर्ण वेदोंमें प्रणव (ओंकार) मैं हूँ, आकाशमें शब्द और मनुष्योंमें पुरुषार्थ मैं हूँ।

    रोमन में पढ़ें

    raso ’ham apsu kaunteya prabhāsmi śhaśhi-sūryayoḥ
    praṇavaḥ sarva-vedeṣhu śhabdaḥ khe pauruṣhaṁ nṛiṣhu

    अध्याय 7 · ज्ञानविज्ञानयोग
    गीता 7.9 श्रीकृष्ण

    पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ।
    जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु ॥

    हिंदी अर्थपृथ्वीमें पवित्र गन्ध मैं हूँ, और अग्निमें तेज मैं हूँ, तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें जीवनीशक्ति मैं हूँ और तपस्वियोंमें तपस्या मैं हूँ।

    रोमन में पढ़ें

    puṇyo gandhaḥ pṛithivyāṁ cha tejaśh chāsmi vibhāvasau
    jīvanaṁ sarva-bhūteṣhu tapaśh chāsmi tapasviṣhu

    अध्याय 7 · ज्ञानविज्ञानयोग
  3. जहाँ भी कुछ विशेष दिखे

    जो कुछ भी सुंदर, तेजस्वी या शक्तिशाली है, उसे मेरे ही तेज का अंश समझो।

    गीता 10.41 श्रीकृष्ण

    यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा।
    तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसंभवम् ॥

    हिंदी अर्थजो-जो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उस-उसको तुम मेरे ही तेज-(योग-) के अंशसे उत्पन्न हुई समझो।

    रोमन में पढ़ें

    yad yad vibhūtimat sattvaṁ śhrīmad ūrjitam eva vā
    tat tad evāvagachchha tvaṁ mama tejo ’nśha-sambhavam

    अध्याय 10 · विभूतियोग
  4. देखने की दृष्टि

    अर्जुन से कृष्ण ने कहा — तुम मुझे इन आँखों से नहीं देख सकते, इसलिए मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि देता हूँ।

    गीता 11.8 श्रीकृष्ण

    न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा।
    दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ॥

    हिंदी अर्थपरन्तु तू अपनी इस आँखसे अर्थात् चर्मचक्षुसे मेरेको देख ही नहीं सकता, इसलिये मैं तुझे दिव्य चक्षु देता हूँ, जिससे तू मेरी ईश्वर-सम्बन्धी सामर्थ्यको देख।

    रोमन में पढ़ें

    na tu māṁ śhakyase draṣhṭum anenaiva sva-chakṣhuṣhā
    divyaṁ dadāmi te chakṣhuḥ paśhya me yogam aiśhwaram

    अध्याय 11 · विश्वरूपदर्शनयोग
  5. जो सबमें देखता है

    जो मुझे सबमें और सबको मुझमें देखता है, उससे मैं कभी दूर नहीं होता।

    गीता 6.30 श्रीकृष्ण

    यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
    तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति ॥

    हिंदी अर्थजो सबमें मुझे देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता।

    रोमन में पढ़ें

    yo māṁ paśhyati sarvatra sarvaṁ cha mayi paśhyati
    tasyāhaṁ na praṇaśhyāmi sa cha me na praṇaśhyati

    अध्याय 6 · ध्यानयोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि भगवान को मानने के लिए चमत्कार देखना ज़रूरी है।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।