गीता कहती है कि भगवान अपनी योगमाया से ढके रहते हैं, इसलिए इन आँखों से सबको नहीं दिखते। पर वे हर जगह पहचाने जा सकते हैं — जल के स्वाद में, सूर्य-चंद्र के प्रकाश में, हर विशेष चीज़ में।
जवाब, कदम-दर-कदम
हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है
1
क्यों नहीं दिखते
मैं अपनी योगमाया से ढका रहने के कारण सबके सामने प्रकट नहीं होता।
हिंदी अर्थहे कुन्तीनन्दन ! जलोंमें रस मैं हूँ, चन्द्रमा और सूर्यमें प्रभा (प्रकाश) मैं हूँ, सम्पूर्ण वेदोंमें प्रणव (ओंकार) मैं हूँ, आकाशमें शब्द और मनुष्योंमें पुरुषार्थ मैं हूँ।
हिंदी अर्थजो-जो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उस-उसको तुम मेरे ही तेज-(योग-) के अंशसे उत्पन्न हुई समझो।
रोमन में पढ़ें
yad yad vibhūtimat sattvaṁ śhrīmad ūrjitam eva vā
tat tad evāvagachchha tvaṁ mama tejo ’nśha-sambhavam
4
देखने की दृष्टि
अर्जुन से कृष्ण ने कहा — तुम मुझे इन आँखों से नहीं देख सकते, इसलिए मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि देता हूँ।
गीता 11.8श्रीकृष्ण
न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ॥
हिंदी अर्थपरन्तु तू अपनी इस आँखसे अर्थात् चर्मचक्षुसे मेरेको देख ही नहीं सकता, इसलिये मैं तुझे दिव्य चक्षु देता हूँ, जिससे तू मेरी ईश्वर-सम्बन्धी सामर्थ्यको देख।
रोमन में पढ़ें
na tu māṁ śhakyase draṣhṭum anenaiva sva-chakṣhuṣhā
divyaṁ dadāmi te chakṣhuḥ paśhya me yogam aiśhwaram
5
जो सबमें देखता है
जो मुझे सबमें और सबको मुझमें देखता है, उससे मैं कभी दूर नहीं होता।
गीता 6.30श्रीकृष्ण
यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति।
तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति ॥
हिंदी अर्थजो सबमें मुझे देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता।
रोमन में पढ़ें
yo māṁ paśhyati sarvatra sarvaṁ cha mayi paśhyati
tasyāhaṁ na praṇaśhyāmi sa cha me na praṇaśhyati
✋ गीता यह नहीं कहती
गीता यह नहीं कहती कि भगवान को मानने के लिए चमत्कार देखना ज़रूरी है।