जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · काम और मेहनत

“नौकरी छूट गई है, खुद को बेकार समझने लगा हूँ — अब क्या करूँ?”

गीता का छोटा जवाब

आप अपनी नौकरी नहीं हैं। गीता कहती है कि जो आप सच में हैं, वह कभी नष्ट नहीं होता। मन की इस कमज़ोरी को बैठने मत दीजिए — उठिए, निश्चय कीजिए, और कोई भी ईमानदार काम छोटा मत समझिए।

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. आप नौकरी नहीं, आत्मा हैं

    यह आत्मा न जन्मता है, न मरता है — शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मरता। पद और तनख़्वाह आते-जाते हैं; आपकी असली कीमत उनसे तय नहीं होती।

    गीता 2.20 श्रीकृष्ण

    न जायते म्रियते वा कदाचि
    न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।
    अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो
    न हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥

    हिंदी अर्थयह शरीरी न कभी जन्मता है और न मरता है तथा यह उत्पन्न होकर फिर होनेवाला नहीं है। यह जन्मरहित, नित्य-निरन्तर रहनेवाला, शाश्वत और पुराण (अनादि) है। शरीरके मारे जानेपर भी यह नहीं मारा जाता।

    रोमन में पढ़ें

    na jāyate mriyate vā kadāchin
    nāyaṁ bhūtvā bhavitā vā na bhūyaḥ
    ajo nityaḥ śhāśhvato ’yaṁ purāṇo
    na hanyate hanyamāne śharīre

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  2. कमज़ोरी को बैठने मत दीजिए

    कृष्ण ने टूटे हुए अर्जुन से कहा — हृदय की इस तुच्छ दुर्बलता को छोड़ो और खड़े हो जाओ। टूटना स्वाभाविक है; टूटे रहना ज़रूरी नहीं।

    गीता 2.3 श्रीकृष्ण

    क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
    क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ॥

    हिंदी अर्थहे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ।

    रोमन में पढ़ें

    klaibyaṁ mā sma gamaḥ pārtha naitat tvayyupapadyate
    kṣhudraṁ hṛidaya-daurbalyaṁ tyaktvottiṣhṭha parantapa

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  3. निश्चय करके फिर उठिए

    कृष्ण कहते हैं — निश्चय करके खड़े हो जाओ। हर दिन कुछ घंटे नई नौकरी की तैयारी, आवेदन और लोगों से मिलने में लगाइए।

    गीता 2.37 श्रीकृष्ण

    हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्।
    तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः ॥

    हिंदी अर्थअगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्धके लिये निश्चय करके खड़ा हो जा।

    रोमन में पढ़ें

    hato vā prāpsyasi swargaṁ jitvā vā bhokṣhyase mahīm
    tasmād uttiṣhṭha kaunteya yuddhāya kṛita-niśhchayaḥ

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  4. कोई ईमानदार काम छोटा नहीं

    कोई भी काम पूरी तरह दोष-रहित नहीं, जैसे आग के साथ धुआँ। अपने काम से ही भगवान की पूजा करके मनुष्य सिद्धि पाता है। बीच का कोई छोटा काम भी अपमान नहीं है।

    गीता 18.48 श्रीकृष्ण

    सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।
    सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः ॥

    हिंदी अर्थहे कुन्तीनन्दन ! दोषयुक्त होनेपर भी सहज कर्मका त्याग नहीं करना चाहिये; क्योंकि सम्पूर्ण कर्म धुएँसे अग्निकी तरह किसी-न-किसी दोषसे युक्त हैं।

    रोमन में पढ़ें

    saha-jaṁ karma kaunteya sa-doṣham api na tyajet
    sarvārambhā hi doṣheṇa dhūmenāgnir ivāvṛitāḥ

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
    गीता 18.46 श्रीकृष्ण

    यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्।
    स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः ॥

    हिंदी अर्थजिस परमात्मासे सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति होती है और जिससे यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है, उस परमात्माका अपने कर्मके द्वारा पूजन करके मनुष्य सिद्धिको प्राप्त हो जाता है।

    रोमन में पढ़ें

    yataḥ pravṛittir bhūtānāṁ yena sarvam idaṁ tatam
    sva-karmaṇā tam abhyarchya siddhiṁ vindati mānavaḥ

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि नौकरी जाना आपकी नाकामी या किसी पाप का फल है।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।