जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · काम और मेहनत

“कर्ज़ में डूब गया हूँ, रात को नींद नहीं आती — क्या करूँ?”

गीता का छोटा जवाब

घबराया हुआ मन सही रास्ता नहीं देख पाता — गीता इसलिए पहले मन को स्थिर करने और फिर एक पक्का निश्चय करने को कहती है। जल्दी पैसा बनाने के गलत रास्ते से बचें, और भरोसा रखें — भगवान में मन लगाने वाला हर कठिनाई पार करता है।

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. पहले मन को थामें

    जिसका मन स्थिर नहीं, उसकी बुद्धि निश्चय नहीं कर पाती; और जिसमें शांति नहीं, उसे सुख कैसे मिले? रात की घबराहट में लिए फ़ैसले अक्सर और उलझाते हैं।

    गीता 2.66 श्रीकृष्ण

    नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
    न चाभावयतः शान्तिरशान्तस्य कुतः सुखम् ॥

    हिंदी अर्थजिसके मन-इन्द्रियाँ संयमित नहीं हैं, ऐसे मनुष्यकी व्यवसायात्मिका बुद्धि नहीं होती और व्यवसायात्मिका बुद्धि न होनेसे उसमें कर्तव्यपरायणताकी भावना नहीं होती। ऐसी भावना न होनेसे उसको शान्ति नहीं मिलती। फिर शान्तिरहित मनुष्यको सुख कैसे मिल सकता है?

    रोमन में पढ़ें

    nāsti buddhir-ayuktasya na chāyuktasya bhāvanā
    na chābhāvayataḥ śhāntir aśhāntasya kutaḥ sukham

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  2. एक पक्का रास्ता चुनें

    निश्चय वाली बुद्धि एक होती है; अनिश्चित मन की शाखाएँ अनगिनत होती हैं। सारे कर्ज़ लिखिए, और एक-एक करके चुकाने की एक योजना पर टिकिए।

    गीता 2.41 श्रीकृष्ण

    व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन।
    बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम् ॥

    हिंदी अर्थहे कुरुनन्दन! इस समबुद्धिकी प्राप्तिके विषयमें व्यवसायात्मिका बुद्धि एक ही होती है। अव्यवसायी मनुष्योंकी बुद्धियाँ अनन्त और बहुशाखाओंवाली ही होती हैं।

    रोमन में पढ़ें

    vyavasāyātmikā buddhir ekeha kuru-nandana
    bahu-śhākhā hyanantāśh cha buddhayo ’vyavasāyinām

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  3. गलत रास्ते से बचें

    गीता ऐसे लोगों की बात करती है जो सैकड़ों आशाओं से बँधकर अन्याय से धन जोड़ने की कोशिश करते हैं — और और गहरे फँसते हैं। नया कर्ज़ लेकर पुराना चुकाने या “दोगुना” वाली स्कीमों से दूर रहें।

    गीता 16.12 श्रीकृष्ण

    आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः।
    ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् ॥

    हिंदी अर्थवे आशाकी सैकड़ों फाँसियोंसे बँधे हुए मनुष्य काम-क्रोधके परायण होकर पदार्थोंका भोग करनेके लिये अन्यायपूर्वक धन-संचय करनेकी चेष्टा करते रहते हैं।

    रोमन में पढ़ें

    āśhā-pāśha-śhatair baddhāḥ kāma-krodha-parāyaṇāḥ
    īhante kāma-bhogārtham anyāyenārtha-sañchayān

    अध्याय 16 · दैवासुरसम्पद्विभागयोग
  4. आप पार होंगे

    कृष्ण का वचन है — मुझमें मन लगाओ, मेरी कृपा से तुम सारी कठिनाइयों को पार कर जाओगे।

    गीता 18.58 श्रीकृष्ण

    मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।
    अथ चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि ॥

    हिंदी अर्थमेरेमें चित्तवाला होकर तू मेरी कृपासे सम्पूर्ण विघ्नोंको तर जायगा और यदि तू अहंकारके कारण मेरी बात नहीं सुनेगा तो तेरा पतन हो जायगा।

    रोमन में पढ़ें

    mach-chittaḥ sarva-durgāṇi mat-prasādāt tariṣhyasi
    atha chet tvam ahankārān na śhroṣhyasi vinaṅkṣhyasi

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि कर्ज़ की बात छिपाओ या अकेले सहो। घर वालों से बात करें और ज़रूरत हो तो किसी भरोसेमंद वित्तीय सलाहकार से मदद लें।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।