गीता 15.7 श्रीकृष्ण ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः। मनःषष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति ॥ हिंदी अर्थइस संसारमें जीव बना हुआ आत्मा मेरा ही सनातन अंश है; परन्तु वह प्रकृतिमें स्थित मन और पाँचों इन्द्रियोंको आकर्षित करता है (अपना मान लेता है)। रोमन में पढ़ें mamaivānśho jīva-loke jīva-bhūtaḥ sanātanaḥ manaḥ-ṣhaṣhṭhānīndriyāṇi prakṛiti-sthāni karṣhati