“रोज़ वही काम, वही ज़िंदगी — आख़िर हम जी किसलिए रहे हैं?”
गीता का छोटा जवाब
गीता कहती है कि आप भगवान के सनातन अंश हैं — जीवन का असली अर्थ उस संबंध को पहचानना है। रोज़ का वही काम भी, भगवान को अर्पण करके किया जाए तो पूजा बन जाता है और सिद्धि तक ले जाता है।
हिंदी अर्थजिस परमात्मासे सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति होती है और जिससे यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है, उस परमात्माका अपने कर्मके द्वारा पूजन करके मनुष्य सिद्धिको प्राप्त हो जाता है।
हिंदी अर्थयज्ञ (कर्तव्यपालन) के लिये किये जानेवाले कर्मोंसे अन्यत्र (अपने लिये किये जानेवाले) कर्मोंमें लगा हुआ यह मनुष्य-समुदाय कर्मोंसे बँधता है, इसलिये हे कुन्तीनन्दन ! तू आसक्ति-रहित होकर उस यज्ञके लिये ही कर्तव्य-कर्म कर।