जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · कर्म और भाग्य

“अगर सब भगवान की मर्ज़ी से होता है, तो मेरी गलती की सज़ा मुझे क्यों?”

गीता का छोटा जवाब

गीता कहती है कि भगवान आपके कर्मों के कर्ता नहीं बनते — कर्म प्रकृति के गुणों से होते हैं और “मैंने किया” का भाव हमारा होता है। आपके पास चुनने की बुद्धि है; इसीलिए कृष्ण ने सब समझाकर अर्जुन से कहा — “अब जैसा चाहो, वैसा करो।”

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. भगवान कर्तापन नहीं रचते

    भगवान न कर्तापन रचते हैं, न कर्म, न कर्मफल का संयोग — यह सब स्वभाव से चलता है। वे किसी का पाप-पुण्य भी नहीं लेते।

    गीता 5.14 श्रीकृष्ण

    न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः।
    न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥

    हिंदी अर्थपरमेश्वर मनुष्योंके न कर्तापनकी, न कर्मोंकी और न कर्मफलके साथ संयोगकी रचना करते हैं; किन्तु स्वभाव ही बरत रहा है।

    रोमन में पढ़ें

    na kartṛitvaṁ na karmāṇi lokasya sṛijati prabhuḥ
    na karma-phala-saṅyogaṁ svabhāvas tu pravartate

    अध्याय 5 · कर्मसंन्यासयोग
    गीता 5.15 श्रीकृष्ण

    नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः।
    अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ॥

    हिंदी अर्थसर्वव्यापी परमात्मा न किसीके पापकर्मको और न शुभकर्मको ही ग्रहण करता है; किन्तु अज्ञानसे ज्ञान ढका हुआ है, उसीसे सब जीव मोहित हो रहे हैं।

    रोमन में पढ़ें

    nādatte kasyachit pāpaṁ na chaiva sukṛitaṁ vibhuḥ
    ajñānenāvṛitaṁ jñānaṁ tena muhyanti jantavaḥ

    अध्याय 5 · कर्मसंन्यासयोग
  2. “मैं करता हूँ” — यह भाव हमारा है

    सारे कर्म प्रकृति के गुणों से होते हैं, पर अहंकार से मोहित मनुष्य खुद को कर्ता मान लेता है। जिस कर्म को हम अपना मानते हैं, उसकी ज़िम्मेदारी भी हमारी बनती है।

    गीता 3.27 श्रीकृष्ण

    प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
    अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताऽहमिति मन्यते ॥

    हिंदी अर्थसम्पूर्ण कर्म सब प्रकारसे प्रकृतिके गुणोंद्वारा किये जाते हैं; परन्तु अहंकारसे मोहित अन्तःकरणवाला अज्ञानी मनुष्य 'मैं कर्ता हूँ' -- ऐसा मानता है।

    रोमन में पढ़ें

    prakṛiteḥ kriyamāṇāni guṇaiḥ karmāṇi sarvaśhaḥ
    ahankāra-vimūḍhātmā kartāham iti manyate

    अध्याय 3 · कर्मयोग
  3. आपके पास चुनाव है

    पूरा ज्ञान देने के बाद भी कृष्ण ने अर्जुन पर फ़ैसला नहीं थोपा — “इस पर अच्छी तरह विचार करके जैसा चाहो, वैसा करो।”

    गीता 18.63 श्रीकृष्ण

    इति ते ज्ञानमाख्यातं गुह्याद्गुह्यतरं मया।
    विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु ॥

    हिंदी अर्थयह गुह्यसे भी गुह्यतर (शरणागतिरूप) ज्ञान मैंने तुझे कह दिया। अब तू इसपर अच्छी तरहसे विचार करके जैसा चाहता है, वैसा कर।

    रोमन में पढ़ें

    iti te jñānam ākhyātaṁ guhyād guhyataraṁ mayā
    vimṛiśhyaitad aśheṣheṇa yathechchhasi tathā kuru

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
  4. सुधार का रास्ता भी आपके हाथ

    गलती मान लेना और खुद को ऊपर उठाना — यही गीता का रास्ता है, दोष भगवान पर डालना नहीं।

    गीता 6.5 श्रीकृष्ण

    उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
    आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

    हिंदी अर्थअपने द्वारा अपना उद्धार करे, अपना पतन न करे; क्योंकि आप ही अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है।

    रोमन में पढ़ें

    uddhared ātmanātmānaṁ nātmānam avasādayet
    ātmaiva hyātmano bandhur ātmaiva ripur ātmanaḥ

    अध्याय 6 · ध्यानयोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि अपनी गलती भगवान पर डाल दें, न यह कि भगवान आपसे गलती करवाते हैं।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।