जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · कर्म और भाग्य

“मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है — क्या भगवान मुझे माफ़ करेंगे?”

गीता का छोटा जवाब

हाँ। गीता में इसका सबसे भरोसे वाला उत्तर है — बहुत बुरे आचरण वाला भी अगर सच्चे मन से भगवान की ओर मुड़ता है, तो वह जल्दी धर्मात्मा बन जाता है। कृष्ण कहते हैं: “शोक मत करो।”

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. मुड़ने वाले के लिए दरवाज़ा खुला है

    अत्यंत दुराचारी भी अनन्य भाव से भजे, तो उसे साधु ही मानना चाहिए — क्योंकि उसने सही निश्चय कर लिया है। वह जल्दी धर्मात्मा बनता है और शाश्वत शांति पाता है।

    गीता 9.30 श्रीकृष्ण

    अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्।
    साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः ॥

    हिंदी अर्थअगर कोई दुराचारी-से-दुराचारी भी अनन्यभावसे मेरा भजन करता है, तो उसको साधु ही मानना चाहिये। कारण कि उसने निश्चय बहुत अच्छी तरह कर लिया है।

    रोमन में पढ़ें

    api chet su-durāchāro bhajate mām ananya-bhāk
    sādhur eva sa mantavyaḥ samyag vyavasito hi saḥ

    अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्ययोग
    गीता 9.31 श्रीकृष्ण

    क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति।
    कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति ॥

    हिंदी अर्थवह तत्काल (उसी क्षण) धर्मात्मा हो जाता है और निरन्तर रहनेवाली शान्तिको प्राप्त हो जाता है। हे कुन्तीनन्दन ! तुम प्रतिज्ञा करो कि मेरे भक्तका विनाश (पतन) नहीं होता।

    रोमन में पढ़ें

    kṣhipraṁ bhavati dharmātmā śhaśhvach-chhāntiṁ nigachchhati
    kaunteya pratijānīhi na me bhaktaḥ praṇaśhyati

    अध्याय 9 · राजविद्याराजगुह्ययोग
  2. ज्ञान की नाव हर पाप से पार कराती है

    यदि तुम सब पापियों से भी अधिक पापी हो, तब भी ज्ञान की नाव से सारे पाप-समुद्र को पार कर जाओगे।

    गीता 4.36 श्रीकृष्ण

    अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः।
    सर्वं ज्ञानप्लवेनैव वृजिनं सन्तरिष्यसि ॥

    हिंदी अर्थअगर तू सब पापियोंसे भी अधिक पापी है, तो भी तू ज्ञानरूपी नौकाके द्वारा निःसन्देह सम्पूर्ण पापसमुद्रसे अच्छी तरह तर जायगा।

    रोमन में पढ़ें

    api ched asi pāpebhyaḥ sarvebhyaḥ pāpa-kṛit-tamaḥ
    sarvaṁ jñāna-plavenaiva vṛijinaṁ santariṣhyasi

    अध्याय 4 · ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
  3. कृष्ण का वचन

    सब छोड़कर मेरी शरण आओ — मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा, चिंता मत करो।

    गीता 18.66 श्रीकृष्ण

    सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
    अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥

    हिंदी अर्थसम्पूर्ण धर्मोंका आश्रय छोड़कर तू केवल मेरी शरणमें आ जा। मैं तुझे सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर दूँगा, चिन्ता मत कर।

    रोमन में पढ़ें

    sarva-dharmān parityajya mām ekaṁ śharaṇaṁ vraja
    ahaṁ tvāṁ sarva-pāpebhyo mokṣhayiṣhyāmi mā śhuchaḥ

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
  4. अब आगे का रास्ता

    पछतावे में डूबे रहना भी खुद को नीचे गिराना है। गलती से सीखकर खुद को ऊपर उठाइए।

    गीता 6.5 श्रीकृष्ण

    उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
    आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

    हिंदी अर्थअपने द्वारा अपना उद्धार करे, अपना पतन न करे; क्योंकि आप ही अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है।

    रोमन में पढ़ें

    uddhared ātmanātmānaṁ nātmānam avasādayet
    ātmaiva hyātmano bandhur ātmaiva ripur ātmanaḥ

    अध्याय 6 · ध्यानयोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि गलती का कोई असर नहीं होता, या बार-बार वही गलती करते हुए माफ़ी मिलती रहेगी। माफ़ी सच्चे बदलाव के साथ आती है।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।