“मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है — क्या भगवान मुझे माफ़ करेंगे?”
गीता का छोटा जवाब
हाँ। गीता में इसका सबसे भरोसे वाला उत्तर है — बहुत बुरे आचरण वाला भी अगर सच्चे मन से भगवान की ओर मुड़ता है, तो वह जल्दी धर्मात्मा बन जाता है। कृष्ण कहते हैं: “शोक मत करो।”
जवाब, कदम-दर-कदम
हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है
1
मुड़ने वाले के लिए दरवाज़ा खुला है
अत्यंत दुराचारी भी अनन्य भाव से भजे, तो उसे साधु ही मानना चाहिए — क्योंकि उसने सही निश्चय कर लिया है। वह जल्दी धर्मात्मा बनता है और शाश्वत शांति पाता है।
गीता 9.30श्रीकृष्ण
अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक्।
साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः ॥
हिंदी अर्थअगर कोई दुराचारी-से-दुराचारी भी अनन्यभावसे मेरा भजन करता है, तो उसको साधु ही मानना चाहिये। कारण कि उसने निश्चय बहुत अच्छी तरह कर लिया है।
रोमन में पढ़ें
api chet su-durāchāro bhajate mām ananya-bhāk
sādhur eva sa mantavyaḥ samyag vyavasito hi saḥ
गीता 9.31श्रीकृष्ण
क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति।
कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति ॥
हिंदी अर्थवह तत्काल (उसी क्षण) धर्मात्मा हो जाता है और निरन्तर रहनेवाली शान्तिको प्राप्त हो जाता है। हे कुन्तीनन्दन ! तुम प्रतिज्ञा करो कि मेरे भक्तका विनाश (पतन) नहीं होता।
रोमन में पढ़ें
kṣhipraṁ bhavati dharmātmā śhaśhvach-chhāntiṁ nigachchhati
kaunteya pratijānīhi na me bhaktaḥ praṇaśhyati
2
ज्ञान की नाव हर पाप से पार कराती है
यदि तुम सब पापियों से भी अधिक पापी हो, तब भी ज्ञान की नाव से सारे पाप-समुद्र को पार कर जाओगे।