“बेईमान लोग मज़े में क्यों हैं और ईमानदार परेशान?”
गीता का छोटा जवाब
गीता बाहर दिखने वाले सुख को असली पैमाना नहीं मानती। जो सुख शुरू में अमृत जैसा और अंत में ज़हर जैसा हो, उसे वह राजस कहती है; और अन्याय से धन जोड़ने वालों की अंतहीन चिंता का सच भी बताती है।
जवाब, कदम-दर-कदम
हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है
1
दिखने वाला सुख और असली सुख
सात्त्विक सुख शुरू में ज़हर जैसा लगता है पर अंत में अमृत बनता है; राजस सुख शुरू में अमृत, अंत में ज़हर। जो आज मज़े में दिखता है, वह कहानी का अंत नहीं है।
हिंदी अर्थहे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! अब तीन प्रकारके सुखको भी तुम मेरेसे सुनो। जिसमें अभ्याससे रमण होता है और जिससे दुःखोंका अन्त हो जाता है, ऐसा वह परमात्मविषयक बुद्धिकी प्रसन्नतासे पैदा होनेवाला जो सुख (सांसारिक आसक्तिके कारण) आरम्भमें विषकी तरह और परिणाममें अमृतकी तरह होता है, वह सुख सात्त्विक कहा गया है।
रोमन में पढ़ें
yat tad agre viṣam iva pariṇāme 'mṛtopamam tat sukhaṁ sāttvikaṁ proktam ātma-buddhi-prasāda-jam
हिंदी अर्थजो सुख इन्द्रियों और विषयोंके संयोगसे आरम्भमें अमृतकी तरह और परिणाममें विषकी तरह होता है, वह सुख राजस कहा गया है।
रोमन में पढ़ें
viṣhayendriya-sanyogād yat tad agre ’mṛitopamam
pariṇāme viṣham iva tat sukhaṁ rājasaṁ smṛitam
2
भीतर की बेचैनी दिखती नहीं
गीता ऐसे लोगों का वर्णन करती है जो मरते दम तक चिंताओं से घिरे रहते हैं, और कामना के सैकड़ों फंदों में बंधकर अन्याय से धन जोड़ते हैं।
गीता 16.11श्रीकृष्ण
चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः।
कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥
हिंदी अर्थवे मृत्युपर्यन्त रहनेवाली अपार चिन्ताओंका आश्रय लेनेवाले, पदार्थोंका संग्रह और उनका भोग करनेमें ही लगे रहनेवाले और 'जो कुछ है, वह इतना ही है' -- ऐसा निश्चय करनेवाले होते हैं।
रोमन में पढ़ें
chintām aparimeyāṁ cha pralayāntām upāśhritāḥ
kāmopabhoga-paramā etāvad iti niśhchitāḥ
हिंदी अर्थवे आशाकी सैकड़ों फाँसियोंसे बँधे हुए मनुष्य काम-क्रोधके परायण होकर पदार्थोंका भोग करनेके लिये अन्यायपूर्वक धन-संचय करनेकी चेष्टा करते रहते हैं।
हिंदी अर्थहे पृथानन्दन ! उसका न तो इस लोकमें और न परलोकमें ही विनाश होता है; क्योंकि हे प्यारे ! कल्याणकारी काम करनेवाला कोई भी मनुष्य दुर्गतिको प्राप्त नहीं जाता।
रोमन में पढ़ें
śhrī bhagavān uvācha
pārtha naiveha nāmutra vināśhas tasya vidyate
na hi kalyāṇa-kṛit kaśhchid durgatiṁ tāta gachchhati
4
तुलना छोड़कर अपना धर्म निभाइए
दूसरे के धर्म से अपना धर्म — भले कम गुणों वाला हो — श्रेष्ठ है। उनकी राह देखकर अपनी राह मत छोड़िए।
हिंदी अर्थअच्छी तरह आचरणमें लाये हुए दूसरेके धर्मसे गुणोंकी कमीवाला अपना धर्म श्रेष्ठ है। अपने धर्ममें तो मरना भी कल्याणकारक है और दूसरेका धर्म भयको देनेवाला है।