गीता 18.25
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 18 · श्लोक 25

गीता 18.25

अध्याय 18 – मोक्षसंन्यासयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 18.25 श्रीकृष्ण

अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्।
मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते ॥

हिंदी अर्थजो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है।

रोमन में पढ़ें

anubandhaṁ kṣhayaṁ hinsām anapekṣhya cha pauruṣham
mohād ārabhyate karma yat tat tāmasam uchyate

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।