गीता 18.25 श्रीकृष्ण अनुबन्धं क्षयं हिंसामनपेक्ष्य च पौरुषम्। मोहादारभ्यते कर्म यत्तत्तामसमुच्यते ॥ हिंदी अर्थजो कर्म परिणाम, हानि, हिंसा और सामर्थ्यको न देखकर मोहपूर्वक आरम्भ किया जाता है, वह तामस कहा जाता है। रोमन में पढ़ें anubandhaṁ kṣhayaṁ hinsām anapekṣhya cha pauruṣham mohād ārabhyate karma yat tat tāmasam uchyate