शिवजी की कृपा से मनोकामना पूर्ति और जीवन में सुख-शांति के लिए
रोहन
ॐ नमः शिवाय!
सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन शिवजी की पूजा और व्रत करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-शांति आती है। यह व्रत विशेष रूप से संतान-सुख और सुखी दांपत्य जीवन की कामना रखने वालों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
व्रत के नियम
सोमवार व्रत करने वाले को प्रातः स्नान कर शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। दिन में एक समय फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। व्रत के दिन क्रोध और झूठ से दूर रहकर मन को शांत रखना आवश्यक है। शिव चालीसा अथवा इस कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
कथा
प्राचीन काल में एक नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। वह प्रतिदिन शिव मंदिर में पूजा करता, परन्तु उसकी कोई संतान नहीं थी। इस दुख के कारण वह प्रत्येक सोमवार को शिवजी का व्रत रखने लगा। उसकी भक्ति देखकर माता पार्वती ने भगवान शिव से उसे पुत्र प्राप्ति का वरदान देने का अनुरोध किया।
शिवजी जानते थे कि व्यापारी के भाग्य में पुत्र-सुख नहीं है, परन्तु माता पार्वती के आग्रह पर उन्होंने व्यापारी को अल्पायु पुत्र का वरदान दिया। कुछ समय बाद व्यापारी के घर पुत्र का जन्म हुआ, परन्तु व्यापारी को यह ज्ञात था कि उसकी आयु अधिक नहीं है।
व्यापारी ने पुत्र को काशी में विद्या अध्ययन हेतु भेजा और साथ ही उसका विवाह करा दिया, यह सोचकर कि विवाह से आयु बढ़ जाती है। मार्ग में यज्ञ करते हुए एक ब्राह्मण ने उस युवक को शिव-पूजा और सोमवार व्रत की महिमा बताई। युवक ने श्रद्धापूर्वक व्रत आरम्भ किया।
शिवजी और पार्वती जी की कृपा से उस युवक की आयु बढ़ गई और वह पूर्ण स्वस्थ होकर अपने घर लौटा। उसके माता-पिता को अपार हर्ष हुआ और उन्होंने भी सोमवार व्रत को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लिया।
व्रत के लाभ
सोमवार व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, संतान-सुख मिलता है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
ॐ नमः शिवाय!