सूर्य देव की कृपा से स्वास्थ्य, समृद्धि और मन की शांति के लिए
रोहन
जय छठी मैया, जय सूर्य देव!
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक अत्यंत कठिन एवं पवित्र व्रत है, जो मुख्यतः बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है। यह व्रत संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण के लिए रखा जाता है।
व्रत के नियम
यह व्रत चार दिनों तक चलता है — पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना (दिन भर उपवास के बाद रात्रि में भोजन), तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। यह व्रत निर्जला रखा जाता है और स्वच्छता तथा शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत को लंबे समय तक कोई संतान नहीं हुई। महर्षि कश्यप के यज्ञ से उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान मिला, परन्तु पुत्र मृत अवस्था में जन्मा। शोकाकुल राजा जब पुत्र का अंतिम संस्कार करने जा रहे थे, तभी देवी षष्ठी (छठी मैया) प्रकट हुईं और उन्होंने कहा कि जो कोई श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा करेगा, उसकी संतान को जीवन और दीर्घायु प्राप्त होगी।
देवी के आशीर्वाद से राजा का पुत्र जीवित हो उठा। इसी घटना से प्रसन्न होकर राजा प्रियव्रत ने छठी मैया की पूजा और व्रत की परंपरा आरम्भ की, जो कालांतर में सूर्य देव की उपासना के साथ जुड़कर छठ पूजा के रूप में प्रसिद्ध हुई।
व्रत के लाभ
छठ पूजा करने से संतान की दीर्घायु और सुरक्षा प्राप्त होती है, सूर्य देव की कृपा से स्वास्थ्य और तेज बढ़ता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।
जय छठी मैया!