बुधवार व्रत कथा

बुधदेव की कृपा से बुद्धि, व्यापार और सफलता की प्राप्ति के लिए

व्रत कथा · 11 बार पढ़ा गया
रोहन

गं गणपतये नमः!

बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से बुद्धि, विद्या और व्यापार में सफलता प्राप्त होती है तथा जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं।

व्रत के नियम

बुधवार व्रत करने वाले को प्रातः स्नान कर गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करने चाहिए। इस दिन हरे वस्त्र धारण करना और हरी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। एक समय सात्विक भोजन ग्रहण कर सत्य और संयम का पालन करना चाहिए।

कथा

एक नगर में एक व्यापारी रहता था, जिसका व्यापार निरंतर घाटे में चल रहा था। चिंतित होकर उसने एक विद्वान पंडित से इसका कारण पूछा। पंडित ने बताया कि उसने कभी गणेश जी की विधिवत पूजा नहीं की, इसी कारण उसके कार्यों में बाधाएँ आ रही हैं।

पंडित के परामर्श पर व्यापारी ने प्रत्येक बुधवार को गणेश जी का व्रत और पूजा आरम्भ की। वह श्रद्धापूर्वक दूर्वा और मोदक अर्पित करता और निर्धनों को भोजन कराता। कुछ ही सप्ताहों में उसके व्यापार में सुधार होने लगा और पुरानी बाधाएँ दूर होती गईं।

एक दिन गणेश जी ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा, "जो कोई भी सच्चे मन से बुधवार का व्रत करता है और मेरी पूजा करता है, उसके सभी विघ्न मैं दूर करता हूँ।" व्यापारी की श्रद्धा और दृढ़ हो गई और उसका व्यापार दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा।

व्रत के लाभ

बुधवार व्रत करने से गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है, बुद्धि तीव्र होती है, व्यापार-व्यवसाय में उन्नति होती है और कार्यों में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।

गणपति बप्पा मोरया!