बृहस्पतिवार व्रत कथा

ज्ञान, समृद्धि और गुरु देव की कृपा प्राप्ति के लिए

व्रत कथा · 15 बार पढ़ा गया
रोहन

ॐ बृं बृहस्पतये नमः!

बृहस्पतिवार अर्थात गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से ज्ञान, धन और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।

व्रत के नियम

गुरुवार व्रत में पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं तथा भगवान विष्णु को पीले पुष्प, चने की दाल और गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन बाल काटना, दाढ़ी बनवाना और नाखून काटना वर्जित माना जाता है। केले के पेड़ की पूजा भी इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग है।

कथा

प्राचीन काल में एक राजा के राज्य में लक्ष्मी जी का वास था, परन्तु राजा अहंकारवश यह मानने लगा कि उसका ऐश्वर्य उसके अपने पुरुषार्थ का फल है, देवी की कृपा का नहीं। यह सुनकर लक्ष्मी जी क्रुद्ध होकर राज्य त्यागकर चली गईं और राज्य में दरिद्रता छा गई।

एक साधु ब्राह्मणी ने राजा को बताया कि गुरुवार का व्रत करने और भगवान विष्णु की उपासना करने से लक्ष्मी जी पुनः प्रसन्न होती हैं। राजा ने विनम्र होकर गुरुवार व्रत आरम्भ किया, प्रत्येक गुरुवार केले के वृक्ष की पूजा की और निर्धनों को अन्न-दान दिया।

धीरे-धीरे राजा का अहंकार दूर हुआ और उसकी श्रद्धा सच्ची हो गई। भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर पुनः राज्य में लौट आईं, और राजा का राज्य पहले से भी अधिक समृद्ध हो गया।

व्रत के लाभ

गुरुवार व्रत करने से भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त होती है, धन-वृद्धि होती है, विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं तथा पारिवारिक जीवन सुखमय बनता है।

जय श्री हरि विष्णु!