पापों से मुक्ति और अनंत सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए
रोहन
जय श्री हरि विष्णु!
अनंत चतुर्दशी व्रत भगवान विष्णु के अनंत रूप को समर्पित है। यह व्रत सुख-समृद्धि, संकटों से मुक्ति और जीवन में स्थिरता की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
व्रत के नियम
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर चौदह गाँठों वाला अनंत सूत्र (डोरा) दाहिनी भुजा में बाँधा जाता है। एक समय भोजन या उपवास रखकर अनंत चतुर्दशी की कथा सुनी जाती है तथा निर्धनों को दान दिया जाता है।
कथा
प्राचीन काल में सुमंत नामक एक ब्राह्मण था, जिसकी पुत्री सुशीला का विवाह कौंडिन्य ऋषि से हुआ। एक दिन कौंडिन्य ऋषि ने नदी तट पर स्त्रियों को अनंत व्रत करते देखा और उत्सुकतावश उनका डोरा उठाकर नदी में फेंक दिया, जिससे व्रत का अनादर हुआ।
इस अनादर के कारण कौंडिन्य ऋषि का सब कुछ नष्ट होने लगा — धन, वैभव, सुख सब समाप्त हो गए। जब उन्हें अपनी भूल का बोध हुआ, तो वे भगवान अनंत (विष्णु) की खोज में वन-वन भटकने लगे। अंततः एक वृद्ध ब्राह्मण के रूप में स्वयं भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और अनंत चतुर्दशी व्रत विधिपूर्वक करने की विधि बताई।
कौंडिन्य ऋषि ने श्रद्धापूर्वक चौदह वर्षों तक यह व्रत किया, जिससे उनका खोया हुआ सुख-वैभव पुनः प्राप्त हुआ और जीवन में स्थिरता लौट आई।
व्रत के लाभ
अनंत चतुर्दशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, खोया हुआ सुख-वैभव पुनः प्राप्त होता है तथा जीवन के संकट दूर होते हैं।
जय अनंत भगवान!