शनि देव की कृपा से कष्टों का नाश और जीवन में समृद्धि के लिए
रोहन
ॐ शं शनैश्चराय नमः!
शनिवार का दिन शनि देव और भगवान हनुमान को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने से शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के दुष्प्रभाव कम होते हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
व्रत के नियम
शनिवार व्रत में काले वस्त्र धारण कर शनि देव को तेल, काले तिल और उड़द अर्पित किए जाते हैं। इस दिन हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। लोहे या काली वस्तुओं का दान करना, तथा पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना इस व्रत का महत्वपूर्ण अंग है।
कथा
एक राजा शनि देव के प्रकोप से पीड़ित होकर अनेक कष्ट भोग रहा था — उसका राज्य छिन गया, धन नष्ट हो गया और वह वन-वन भटकने लगा। एक दिन उसकी भेंट एक ऋषि से हुई, जिन्होंने उसे बताया कि यह शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है और शनिवार व्रत तथा हनुमान जी की उपासना करने से इसका निवारण संभव है।
राजा ने श्रद्धापूर्वक शनिवार व्रत आरम्भ किया, प्रत्येक शनिवार शनि देव को तेल अर्पित करता और हनुमान जी की पूजा करता। उसने निर्धनों और असहायों की सहायता करना भी आरम्भ किया, जिससे उसके पाप कर्म क्षीण होने लगे।
धीरे-धीरे शनि देव प्रसन्न हुए और राजा के कष्ट दूर होने लगे। कुछ समय पश्चात उसे उसका राज्य पुनः प्राप्त हुआ और वह न्यायप्रिय व धर्मात्मा राजा के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
व्रत के लाभ
शनिवार व्रत करने से शनि देव के अशुभ प्रभाव कम होते हैं, हनुमान जी की कृपा से बल और साहस मिलता है, तथा जीवन में स्थिरता व सुख-शांति आती है।
जय शनि देव, जय बजरंग बली!