मंगलवार व्रत कथा

शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति के लिए आशीर्वाद प्राप्त करें

व्रत कथा · 10 बार पढ़ा गया
रोहन

जय माँ पार्वती, जय गणेश!

मंगलवार का दिन हनुमान जी और गणेश जी दोनों को समर्पित माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से बल, बुद्धि और साहस की प्राप्ति होती है तथा शत्रुओं व संकटों से रक्षा होती है।

व्रत के नियम

मंगलवार व्रत में प्रातः स्नान कर हनुमान जी को सिंदूर, चोला और लाल पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इस दिन एक समय भोजन या फलाहार किया जाता है, तथा नमक का त्याग शुभ माना जाता है। हनुमान चालीसा का पाठ करना और ब्रह्मचर्य का पालन इस व्रत का मुख्य नियम है।

कथा

एक गाँव में एक निर्धन ब्राह्मणी रहती थी। वह प्रतिदिन हनुमान मंदिर जाकर दीपक जलाती और प्रार्थना करती थी, परन्तु उसके पास इतना धन नहीं था कि वह नियमित रूप से भोग अर्पित कर सके। एक मंगलवार उसने संकल्प लिया कि जब तक हनुमान जी उसकी दरिद्रता दूर नहीं करेंगे, वह प्रतिदिन मंदिर आती रहेगी।

उसकी अटूट श्रद्धा देखकर हनुमान जी ने एक साधु का रूप धारण कर उसे दर्शन दिए और कहा, "हे माता! तुम प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखो और मेरी पूजा करो, तुम्हारा दारिद्र्य दूर हो जाएगा।" ब्राह्मणी ने श्रद्धापूर्वक व्रत आरम्भ किया।

धीरे-धीरे उसके घर में धन-धान्य की वृद्धि होने लगी, कष्ट दूर हुए और परिवार में सुख-शांति आई। उसने अपने अनुभव पूरे गाँव को सुनाए, जिससे मंगलवार व्रत की महिमा दूर-दूर तक फैल गई और लोग श्रद्धापूर्वक इसे करने लगे।

व्रत के लाभ

मंगलवार व्रत करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, भय और शत्रु-बाधा दूर होती है, तथा शारीरिक व मानसिक बल में वृद्धि होती है। जीवन के संकट दूर होकर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

जय बजरंग बली!