पापों का नाश और परमात्मा की कृपा प्राप्ति के लिए
रोहन
जय श्री हरि विष्णु!
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पुण्यदायी व्रतों में से एक है। प्रत्येक माह में दो एकादशी आती हैं, और इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्रत के नियम
एकादशी व्रत में अन्न का सेवन वर्जित माना जाता है, केवल फलाहार किया जाता है। भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी अर्चना और विष्णु सहस्रनाम का पाठ इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी को शुभ मुहूर्त में किया जाता है।
कथा
प्राचीन काल में मुर नामक एक अत्यंत बलशाली राक्षस था, जिसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु ने मुर राक्षस से युद्ध किया, परन्तु युद्ध करते-करते थककर एक गुफा में विश्राम करने चले गए।
मुर राक्षस भगवान का पीछा करते हुए उसी गुफा में पहुँचा और उन पर वार करने ही वाला था कि भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई, जिसने अपने तेज से मुर राक्षस का वध कर दिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उस कन्या को "एकादशी" नाम दिया और वरदान दिया कि जो भी भक्त इस तिथि को व्रत रखेगा, उसके सभी पाप नष्ट होकर उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।
तभी से एकादशी व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति पाने के लिए श्रद्धापूर्वक रखा जाने लगा।
व्रत के लाभ
एकादशी व्रत करने से पापों का नाश होता है, मन शुद्ध होता है, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जय श्री हरि विष्णु!