भैयादूज कथा

भाई-बहन के प्रेम और परिवार में सौभाग्य व समृद्धि के लिए

व्रत कथा · 12 बार पढ़ा गया
रोहन

जय यमराज, जय यमुना जी!

भैयादूज का पर्व भाई-बहन के पवित्र स्नेह को समर्पित है। यह दीपावली के दो दिन पश्चात मनाया जाता है, जिस दिन बहनें अपने भाई की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

तिलक और पूजा विधि

इस दिन बहनें भाई को अपने घर बुलाकर आसन पर बिठाती हैं, उसे तिलक लगाकर आरती उतारती हैं और उसकी दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। भाई अपनी बहन को उपहार व आशीर्वाद देते हैं तथा साथ में भोजन करते हैं।

कथा

प्राचीन कथा के अनुसार यमराज अपनी बहन यमुना जी से मिलने बहुत समय तक नहीं गए थे। यमुना जी बार-बार अपने भाई को आमंत्रित करती रहीं, परन्तु यमराज व्यस्तता के कारण नहीं जा पाए। एक दिन यमराज को अपनी भूल का एहसास हुआ और वे कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन बहन यमुना के घर पहुँचे।

यमुना जी ने अपने भाई का भावभीना स्वागत किया, उन्हें तिलक लगाया, भोजन कराया और दीर्घायु की कामना की। यमराज इस स्नेह से अत्यंत प्रसन्न हुए और यमुना जी को वरदान दिया कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।

तभी से भैयादूज का यह पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह के प्रतीक के रूप में मनाया जाने लगा।

पूजा के लाभ

भैयादूज मनाने से भाई-बहन के बीच स्नेह और विश्वास बढ़ता है, भाई की आयु लंबी होती है तथा परिवार में सुख-सौहार्द बना रहता है।

जय यमुना जी!