गीता 18.39 श्रीकृष्ण यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः। निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम् ॥ हिंदी अर्थनिद्रा, आलस्य और प्रमादसे उत्पन्न होनेवाला जो सुख आरम्भमें और परिणाममें अपनेको मोहित करनेवाला है, वह सुख तामस कहा गया है। रोमन में पढ़ें yad agre chānubandhe cha sukhaṁ mohanam ātmanaḥ nidrālasya-pramādotthaṁ tat tāmasam udāhṛitam