गीता 16.4
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 16 · श्लोक 4

गीता 16.4

अध्याय 16 – दैवासुरसम्पद्विभागयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 16.4 श्रीकृष्ण

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च।
अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम् ॥

हिंदी अर्थहे पृथानन्दन ! दम्भ करना, घमण्ड करना, अभिमान करना, क्रोध करना, कठोरता रखना और अविवेकका होना भी -- ये सभी आसुरीसम्पदाको प्राप्त हुए मनुष्यके लक्षण हैं।

रोमन में पढ़ें

dambho darpo ’bhimānaśh cha krodhaḥ pāruṣhyam eva cha
ajñānaṁ chābhijātasya pārtha sampadam āsurīm

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।