गीता 12.9
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 12 · श्लोक 9

गीता 12.9

अध्याय 12 – भक्तियोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 12.9 श्रीकृष्ण

अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम्।
अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय ॥

हिंदी अर्थअगर तू मनको मेरेमें अचलभावसे स्थिर (अर्पण) करनेमें समर्थ नहीं है, तो हे धनञ्जय ! अभ्यासयोगके द्वारा तू मेरी प्राप्तिकी इच्छा कर।

रोमन में पढ़ें

atha chittaṁ samādhātuṁ na śhaknoṣhi mayi sthiram
abhyāsa-yogena tato mām ichchhāptuṁ dhanañjaya

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।