गीता 12.9 श्रीकृष्ण अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम्। अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय ॥ हिंदी अर्थअगर तू मनको मेरेमें अचलभावसे स्थिर (अर्पण) करनेमें समर्थ नहीं है, तो हे धनञ्जय ! अभ्यासयोगके द्वारा तू मेरी प्राप्तिकी इच्छा कर। रोमन में पढ़ें atha chittaṁ samādhātuṁ na śhaknoṣhi mayi sthiram abhyāsa-yogena tato mām ichchhāptuṁ dhanañjaya