जीवन के सवाल
कुंडलीपंचांग
जीवन का सवाल · दुख और कठिन समय

“सब कुछ बिखर गया है, कुछ समझ नहीं आता कि अब क्या करूँ।”

गीता का छोटा जवाब

गीता ठीक इसी हालत से शुरू होती है — अर्जुन ने भी कहा था, “मेरी समझ काम नहीं कर रही, मुझे बताइए।” कृष्ण का पहला जवाब था: हिम्मत मत हारो, उठो। और अंतिम: मेरी शरण आओ, चिंता मत करो।

जवाब, कदम-दर-कदम

हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है

  1. अर्जुन भी यहीं खड़े थे

    “कायरता ने मेरे स्वभाव को ढक लिया है, धर्म के विषय में मेरी बुद्धि मोहित है — जो मेरे लिए हितकर हो, वह बताइए।”

    गीता 2.7 अर्जुन

    कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः
    पृच्छामि त्वां धर्मसंमूढचेताः।
    यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे
    शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ॥

    हिंदी अर्थकायरतारूप दोषसे तिरस्कृत स्वभाववाला और धर्मके विषयमें मोहित अन्तःकरणवाला मैं आपसे पूछता हूँ कि जो निश्चित कल्याण करनेवाली हो, वह मेरे लिये कहिये। मैं आपका शिष्य हूँ। आपके शरण हुए मुझे शिक्षा दीजिये।

    रोमन में पढ़ें

    kārpaṇya-doṣhopahata-svabhāvaḥ
    pṛichchhāmi tvāṁ dharma-sammūḍha-chetāḥ
    yach-chhreyaḥ syānniśhchitaṁ brūhi tanme
    śhiṣhyaste ’haṁ śhādhi māṁ tvāṁ prapannam

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  2. पहला कदम: उठना

    हृदय की इस दुर्बलता को छोड़ो और उठ खड़े हो।

    गीता 2.3 श्रीकृष्ण

    क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते।
    क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ॥

    हिंदी अर्थहे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ।

    रोमन में पढ़ें

    klaibyaṁ mā sma gamaḥ pārtha naitat tvayyupapadyate
    kṣhudraṁ hṛidaya-daurbalyaṁ tyaktvottiṣhṭha parantapa

    अध्याय 2 · सांख्ययोग
  3. पूछना हार नहीं है

    जानकार से विनम्रता से पूछना गीता का ही रास्ता है।

    गीता 4.34 श्रीकृष्ण

    तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
    उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥

    हिंदी अर्थउस- (तत्त्वज्ञान-) को (तत्त्वदर्शी ज्ञानी महापुरुषोंके पास जाकर) समझ। उनको साष्टाङ्ग दण्डवत् प्रणाम करनेसे, उनकी सेवा करनेसे और सरलतापूर्वक प्रश्न करनेसे वे तत्त्वदर्शी ज्ञानी महापुरुष तुझे उस तत्त्वज्ञानका उपदेश देंगे।

    रोमन में पढ़ें

    tad viddhi praṇipātena paripraśhnena sevayā
    upadekṣhyanti te jñānaṁ jñāninas tattva-darśhinaḥ

    अध्याय 4 · ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
  4. हर कठिनाई पार होगी

    मुझमें मन लगाकर तुम मेरी कृपा से सब कठिनाइयों को पार कर जाओगे।

    गीता 18.58 श्रीकृष्ण

    मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।
    अथ चेत्त्वमहङ्कारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि ॥

    हिंदी अर्थमेरेमें चित्तवाला होकर तू मेरी कृपासे सम्पूर्ण विघ्नोंको तर जायगा और यदि तू अहंकारके कारण मेरी बात नहीं सुनेगा तो तेरा पतन हो जायगा।

    रोमन में पढ़ें

    mach-chittaḥ sarva-durgāṇi mat-prasādāt tariṣhyasi
    atha chet tvam ahankārān na śhroṣhyasi vinaṅkṣhyasi

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
  5. अंतिम भरोसा

    सब छोड़कर मेरी शरण आओ — मैं तुम्हें मुक्त करूँगा, शोक मत करो।

    गीता 18.66 श्रीकृष्ण

    सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
    अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥

    हिंदी अर्थसम्पूर्ण धर्मोंका आश्रय छोड़कर तू केवल मेरी शरणमें आ जा। मैं तुझे सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर दूँगा, चिन्ता मत कर।

    रोमन में पढ़ें

    sarva-dharmān parityajya mām ekaṁ śharaṇaṁ vraja
    ahaṁ tvāṁ sarva-pāpebhyo mokṣhayiṣhyāmi mā śhuchaḥ

    अध्याय 18 · मोक्षसंन्यासयोग
गीता यह नहीं कहती

गीता यह नहीं कहती कि टूटना कमज़ोरी है। वह टूटे हुए अर्जुन से ही शुरू होती है।

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जवाब और उनकी व्याख्या SachiBhakti की है; मूल बात ऊपर दिए श्लोकों में पढ़ें। हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है।