“सब कुछ बिखर गया है, कुछ समझ नहीं आता कि अब क्या करूँ।”
गीता का छोटा जवाब
गीता ठीक इसी हालत से शुरू होती है — अर्जुन ने भी कहा था, “मेरी समझ काम नहीं कर रही, मुझे बताइए।” कृष्ण का पहला जवाब था: हिम्मत मत हारो, उठो। और अंतिम: मेरी शरण आओ, चिंता मत करो।
जवाब, कदम-दर-कदम
हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है
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अर्जुन भी यहीं खड़े थे
“कायरता ने मेरे स्वभाव को ढक लिया है, धर्म के विषय में मेरी बुद्धि मोहित है — जो मेरे लिए हितकर हो, वह बताइए।”
हिंदी अर्थकायरतारूप दोषसे तिरस्कृत स्वभाववाला और धर्मके विषयमें मोहित अन्तःकरणवाला मैं आपसे पूछता हूँ कि जो निश्चित कल्याण करनेवाली हो, वह मेरे लिये कहिये। मैं आपका शिष्य हूँ। आपके शरण हुए मुझे शिक्षा दीजिये।
हिंदी अर्थहे पृथानन्दन अर्जुन ! इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो; क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है। हे परंतप ! हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ।
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥
हिंदी अर्थउस- (तत्त्वज्ञान-) को (तत्त्वदर्शी ज्ञानी महापुरुषोंके पास जाकर) समझ। उनको साष्टाङ्ग दण्डवत् प्रणाम करनेसे, उनकी सेवा करनेसे और सरलतापूर्वक प्रश्न करनेसे वे तत्त्वदर्शी ज्ञानी महापुरुष तुझे उस तत्त्वज्ञानका उपदेश देंगे।
रोमन में पढ़ें
tad viddhi praṇipātena paripraśhnena sevayā
upadekṣhyanti te jñānaṁ jñāninas tattva-darśhinaḥ
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हर कठिनाई पार होगी
मुझमें मन लगाकर तुम मेरी कृपा से सब कठिनाइयों को पार कर जाओगे।