गीता जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा और रोग को शरीर का स्वभाव मानती है — यह किसी की सज़ा नहीं। शरीर बदलता है, भीतर का “मैं” नहीं; और इस कठिन समय में भी भगवान अपने भक्त का ध्यान रखते हैं।
जवाब, कदम-दर-कदम
हर कदम के साथ वह श्लोक, जिस पर वह आधारित है
1
रोग शरीर का स्वभाव है
जन्म, मृत्यु, बुढ़ापे और रोग में दुख-दोष को समझना — गीता इसे ज्ञान का एक लक्षण कहती है। ये शरीर के साथ जुड़े हैं, किसी का दंड नहीं।
हिंदी अर्थइन्द्रियोंके विषयोंमें वैराग्यका होना, अहंकारका भी न होना और जन्म, मृत्यु, वृद्धावस्था तथा व्याधियोंमें दुःखरूप दोषोंको बार-बार देखना।
रोमन में पढ़ें
indriyārtheṣhu vairāgyam anahankāra eva cha
janma-mṛityu-jarā-vyādhi-duḥkha-doṣhānudarśhanam
2
शरीर बदलता है, आप नहीं
जैसे इस शरीर में बचपन, जवानी और बुढ़ापा आते हैं, वैसे ही सब बदलाव शरीर के हैं — भीतर का आत्मा वही रहता है।
गीता 2.13श्रीकृष्ण
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति ॥
हिंदी अर्थदेहधारीके इस मनुष्यशरीरमें जैसे बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है, ऐसे ही देहान्तरकी प्राप्ति होती है। उस विषयमें धीर मनुष्य मोहित नहीं होता।
रोमन में पढ़ें
dehino ’smin yathā dehe kaumāraṁ yauvanaṁ jarā
tathā dehāntara-prāptir dhīras tatra na muhyati
3
कठिन समय अनित्य है
सुख-दुःख आते-जाते हैं — धैर्य से सहन कीजिए।
गीता 2.14श्रीकृष्ण
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः।
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥
हिंदी अर्थहे कुन्तीनन्दन! इन्द्रियोंके जो विषय (जड पदार्थ) हैं, वो तो शीत (अनुकूलता) और उष्ण (प्रतिकूलता) - के द्वारा सुख और दुःख देनेवाले हैं तथा आने-जानेवाले और अनित्य हैं। हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! उनको तुम सहन करो।
रोमन में पढ़ें
mātrā-sparśhās tu kaunteya śhītoṣhṇa-sukha-duḥkha-dāḥ
āgamāpāyino ’nityās tans-titikṣhasva bhārata
4
आपकी देखभाल हो रही है
जो भगवान पर भरोसा रखते हैं, उनका योगक्षेम भगवान स्वयं संभालते हैं।
गीता 9.22श्रीकृष्ण
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥
हिंदी अर्थजो अनन्य भक्त मेरा चिन्तन करते हुए मेरी उपासना करते हैं, मेरेमें निरन्तर लगे हुए उन भक्तोंका योगक्षेम (अप्राप्तकी प्राप्ति और प्राप्तकी रक्षा) मैं वहन करता हूँ।
रोमन में पढ़ें
ananyāśh chintayanto māṁ ye janāḥ paryupāsate
teṣhāṁ nityābhiyuktānāṁ yoga-kṣhemaṁ vahāmyaham
✋ गीता यह नहीं कहती
गीता यह नहीं कहती कि बीमारी किसी पाप की सज़ा है, न यह कि इलाज छोड़कर सिर्फ़ प्रार्थना करो। स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।