गीता 6.13 श्रीकृष्ण समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः। संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥ हिंदी अर्थकाया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे। रोमन में पढ़ें samaṁ kāya-śhiro-grīvaṁ dhārayann achalaṁ sthiraḥ samprekṣhya nāsikāgraṁ svaṁ diśhaśh chānavalokayan