गीता 17.22 श्रीकृष्ण अदेशकाले यद्दानमपात्रेभ्यश्च दीयते। असत्कृतमवज्ञातं तत्तामसमुदाहृतम् ॥ हिंदी अर्थजो दान बिना सत्कारके तथा अवज्ञापूर्वक अयोग्य देश और कालमें कुपात्रको दिया जाता है, वह दान तामस कहा गया है। रोमन में पढ़ें adeśha-kāle yad dānam apātrebhyaśh cha dīyate asat-kṛitam avajñātaṁ tat tāmasam udāhṛitam