मन की शांति, रोग निवारण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए
रोहन
जय जय तुलसी माता, महिमा अपरम्पार। विष्णुप्रिया वृंदा कहाई, जग की तुम आधार॥
जय तुलसी महारानी। शालिग्राम की प्राण पियारी। सब देवन में उत्तम तेरी, शोभा सबसे न्यारी॥
तुलसी पत्र बिना न स्वीकारे, विष्णु भोग कोई भाई। तुलसी दल शिर धारे, जो प्रभु की सेवा पाई॥
क्षीरसागर की कथा पुरानी, वृंदा नाम कहाई। पतिव्रता के तेज से जाकी, त्रिभुवन ज्योति जगाई॥
शालिग्राम रूप में विष्णु, तुलसी संग विवाहे। हर घर आंगन तुलसी पूजे, मंगल गीत सुनावे॥
प्रातः काल जो तुलसी पूजे, जल अरु दीप जलावे। रोग शोक सब दूर हो जाए, सुख समृद्धि घर आवे॥
तुलसी वन में जो नर बैठे, पाप ताप सब जाए। तुलसी की छाया जो पावे, जीवन सफल हो जाए॥
एकादशी को तुलसी विवाह, हर्ष सहित सब मनावें। शालिग्राम तुलसी की जोड़ी, घर घर मंगल गावें॥
तुलसी माता कृपा करो, सब दुख दूर भगाओ। विष्णु भक्ति का दान दे मुझको, भवसागर तार लगाओ॥
जो यह तुलसी चालीसा पढ़े, सुख सम्पत्ति घर आवे। रोग शोक संकट सब मिटे, तुलसी माता सुखदावे॥
जय जय जय तुलसी माता। सकल जगत की तुम सुखदाता॥
दोहा: तुलसी चालीसा पढ़े, नित प्रति करे प्रणाम। विष्णु प्रिया की कृपा से, पूरण हो सब काम॥