गायत्री चालीसा

बुद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनमोल स्तुति

चालीसा · 15 बार पढ़ा गया
रोहन

नमो गायत्री महामाते, जगत जननी जगद्व्यापिने।

सर्व सिद्धि प्रदायिनि देवि, सर्व दुःख हरन त्रिपुरारी॥

जय गायत्री महादेवी, जगत जननी जगद्व्यापिनी।

सर्व सिद्धि प्रदायिनि देवि, सर्व दुःख हरन त्रिपुरारी॥

सूर्य की प्रथम किरण से, जगत को जो प्रकाश दे।

गायत्री माँ की आराधना, सब पापों का नाश करे॥

सर्वज्ञानी सर्वशक्तिमान, गायत्री माँ जगदम्बिका।

संकट हरन सुखदायिनी, करुणा मूरत महादेवी॥

जो कोई भी तेरा जाप करे, मनोकामना पूरी हो जाए।

दुःख दूर हो सुख बढ़े, जीवन में उजियारा छा जाए॥

गायत्री माँ की महिमा अपरंपार, जो जानता है वह धन्य है।

सर्व देवों की वह माता, जगत की वह पालनहार है॥

गायत्री चालीसा पढ़ने से, पापों का नाश होता है।

सुख-समृद्धि का वास होता, जीवन में प्रकाश होता है॥

जय गायत्री महामाते, जगत जननी जगद्व्यापिने।

सर्व सिद्धि प्रदायिनि देवि, सर्व दुःख हरन त्रिपुरारी॥