आध्यात्मिक ज्ञान, मन की शांति और जीवन में सफलता के लिए
रोहन
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥
एक रूप न आवै गुरु, अनेक रूप धरै। जैसे राम, जैसे कृष्ण, तैसे गुरु न धरै॥
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर। गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥
गुरु पद पद्म जपहु, गुरु वचन मन माहीं। गुरु बिना नहिं पावहु, सुख चैन मन काहि॥
गुरु बिना ज्ञान न आवै, गुरु बिना सुमिरन नाहीं। गुरु बिना मोक्ष न पावहु, गुरु बिना नहिं भाई॥
गुरु कृपा सुमिरन करि, भवसागर तर जाई। गुरु कृपा बिना नहिं पावहु, सुख चैन मन लाई॥
गुरु चरण कमल ध्यावहु, मन में सदा बसा। गुरु बिना नहिं पावहु, सुख चैन मन का॥
गुरु कृपा सुमिरन करि, भवसागर तर जाई। गुरु कृपा बिना नहिं पावहु, सुख चैन मन लाई॥
गुरु बिना नहिं पावहु, सुख चैन मन काहि। गुरु कृपा सुमिरन करि, भवसागर तर जाई॥
जो सत गुरु की सेवा करै, भवसागर तर जाई। जो गुरु की शरण पावै, सब दुख मिट जाई॥