संकट निवारण, मानसिक शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए
रोहन
जनक सुता जग जननी जानकी। अवधपुरी की रानी मानी॥
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं। जय सीता रामचंद्र पिया। दीनबंधु दीनदयाला दया॥
सुनहु सीता भवानी कथा। करहु मन में सदा स्नेहा॥
सीता माता जगत माई। राम लला की प्यारी भाई।
धन्य धन्य तिहुं लोक कहैं। सीता सुमिरन सुख पावैं॥
अयोध्या नगरी के वासी। सीता के चरणों के दासी।
राम नाम जपि मन लगाई। भवसागर से पार पाई॥
सीता माता महा बलधारी। संकट हरनि सुखकारी।
जाके चरण कमल में बसे। सब दुख दूर होइ बसे॥
रामचंद्र की प्रिय सखी। सीता माता जगत सुखी।
जिन्हें ध्यावे मन लगाकर। भवसागर से पार उतार॥
सीता माता करुणा सागर। संकट मोचन जगत भागर।
जिन्हें स्मरण मात्र से ही। पाप हरे सब दुख भागर॥
राम लला की प्यारी माता। सीता रूपा जगत साता।
जिन्हें ध्यावे मन लगाकर। भवसागर से पार उतार॥
सीता माता महा दानी। दीन दयालु जगत पानी।
जिन्हें ध्यावे मन लगाकर। भवसागर से पार उतार॥
जय जय जय सीता माता। भवसागर की नाविक साता।
जिन्हें स्मरण मात्र से ही। पाप हरे सब दुख भागी॥
दोहा-जयति जयति सीता माता। भवसागर तरनिहारी।
राम नाम जपि मन लगाई। सुख पाई भवसागर तारी॥