सरस्वती चालीसा

ज्ञान, विद्या और मन की शुद्धि के लिए सर्वोत्तम स्तुति

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रोहन

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

सरस्वती माता जाकी जय जय कार। सकल विद्या की दाता, सुख करे उद्धार॥

वाणी की मूरत सुन्दर, ज्ञान की है माया। जो कोई करे सुमिरन, होय बुद्धि का पाया॥

विद्या दान की देवी, सबकी है आराधना। जो कोई करे पूजा, होय बुद्धि का प्रगटना॥

वेदों की है रचयिता, शास्त्रों की है माता। जो कोई करे स्मरण, मिटे सबकी व्यथा॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सारं ज्ञानमयं जगत् परम्। सरस्वतीं वन्दे देवि व्याप्तं येन जगत्त्रयम्॥

सुख संपदा की दाता, दुःख हरणी माता। जो कोई करे सुमिरन, होय बुद्धि का प्रगटना॥

विद्या की देवी माता, वाणी की है मूरत। जो कोई करे सुमिरन, होय बुद्धि का पूरन॥

सरस्वती माता जाकी, जय जय कार होई। सकल विद्या की दाता, सुख करे उद्धार होई॥