नाग चालीसा

संकट निवारण, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए

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रोहन

श्रीगणेशाय नमः। जय नागराज दयालु, सब पीड़ा हरन वाले।

सर्प देवता जगत में, कृपा करो हरि वाले॥

नागराज दयालु भये, संकट हरन हितकारी।

सर्पों के स्वामी तुम हो, सब जगत के प्यारे॥

सर्पों का तुम ही आधार, विष का तुम ही नाश।

तुम्हारे चरणों में शीश, जो रखे उसका कल्याण॥

नाग देवता कृपा करो, संकट से जो बचाओ।

तुम्हारे नाम से ही मिटे, सब दुःख और पाप सारे॥

नाग देवता की पूजा से, मनुष्य को मिले सुख।

सर्पों का भय मिटे सबका, जीवन हो धन्य ध्रुव॥

नाग देवता की महिमा, सुनो भक्त जन ध्यान से।

जो भी करे सच्चा भजन, पावे सुख अपार॥

नाग देवता के चरणों में, शीश नवाओ सदा।

उनकी कृपा से ही मिटे, सब कष्ट और बला॥

जय नागराज दयालु, संकट हरन हितकारी।

सर्पों के स्वामी तुम हो, सब जगत के प्यारे॥

जो कोई नाग देवता का, मन से करे जाप।

सभी कष्ट दूर होते हैं, मिलता है सुख अपार॥