झूलेलाल चालीसा

संकटों से मुक्ति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए

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रोहन

जय जय झूलेलाल जी, दीन दयालु सदा। संकट हरै संकट हरै, भवसागर से उबारा॥

सिंधु के पार बसे, दयालु देव सखा। भक्तों के संकट हरै, झूलेलाल महा॥

जय झूलेलाल दयाल, संकटमोचन प्यारे। भक्तजन के संकट हर, सुखदाई हमारे॥

सिंधु नदी के पार, अवतरित हुए आप। भक्तों के संकट हरने, बने संकट नाशक॥

सूरज की भाँति तेजस्वी, चंद्रमा समान शीतल। झूलेलाल के चरणों में, सदा सुख मिलता॥

दीन दुखियों के दाता, संकटमोचन प्यारे। भक्तों के संकट हरै, झूलेलाल हमारे॥

नमस्कार तेरे चरणों को, जो देते हैं शरण। भक्तों के संकट हरै, झूलेलाल दयाल॥

सिंधु के पार बसे, दयालु देव सखा। भक्तों के संकट हरै, झूलेलाल महा॥

तेरे नाम से ही मिटे, सब कष्ट और पीड़ा। भक्तों के संकट हरै, झूलेलाल दयाल॥

जय जय झूलेलाल जी, दीन दयालु सदा। संकट हरै संकट हरै, भवसागर से उबारा॥

जय झूलेलाल दयालु, संकटमोचन प्यारे। भक्तजन के संकट हर, सुखदाई हमारे॥