असुरों से रक्षा, भय निवारण और साहस प्राप्ति के लिए
रोहन
श्री भैरव जी की चालीसा, जो भी पढ़े मन से, संकट हरता है, सुख समृद्धि देता है।
जय भैरव, जय भैरव, संकट नाशक दाता। जो कोई भी करे जाप, सब दुखों का करता।
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै न काराय नमः शिवाय॥
काल भैरव रूपाय कालाग्नि नायकाय। कालाग्नि नायकाय भैरवाय नमो नमः॥
सर्व सिद्धि प्रदायकाय सर्व दोष नाशकाय। सर्व पाप हरताय भैरवाय नमो नमः॥
त्रिपुरान्तकाय त्रिपुरारी त्रिपुर भूषणाय। त्रिपुरान्तकाय भैरवाय नमो नमः॥
शिवाय शम्भवे शूलपाणये च। भैरवाय कालरात्रये नमो नमः॥
सर्व भूत हिताय सर्व लोक हिताय। सर्व दुःख नाशकाय भैरवाय नमो नमः॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवे। काल भैरव जब नाम सुनावे॥
नासे रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर भैरव पीरा॥
संकट से भैरव जन छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन शिव दुलारे॥
तुम्हरे भजन शिव को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
और देवता चित्त न धरई। भैरव सेइ सर्ब सुख करई॥
दोहा — जय जय जय भैरव देव, संकट मोचन महादेव। जो कोई करे भक्ति सुमिरन, सुख समृद्धि हो सर्वदेव॥