दुष्टों से रक्षा, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए
रोहन
जयति जयति बगलामुखि, भुज बलि करि दहइ।
संकट मोचन करहुं देवी, सदा सुखदायक भव।
बगलामुखि महा देवी, संकट हरन सुखदाई।
दुष्ट दलन करहुं प्रीति, भक्तन की रखहुं छाई॥
सिंहासन धारिणी माता, जटामुकुट सुशोभित।
तीन नेत्र त्रिपुरारी, दुष्ट दलन करि हित॥
पीला वस्त्र धारण करी, कमल पद पद्मिनी।
दुष्ट दलन करहुं माता, भक्तन की रखहुं छिनी॥
हाथ में गदा धारण करी, मुख पीला बड़ा भारी।
दुष्ट दलन करहुं माता, संकट हरहुं भारी॥
सिंह वाहन सदा सवारी, दुष्ट दलन करहुं प्रिया।
भक्तन की रक्षा करहुं, संकट हरहुं सदा दया॥
जो कोई जपै नाम तेरा, संकट से होए मुक्त।
बगलामुखि महा देवी, करहुं सबकी रक्षा॥
दुष्ट दलन करहुं माता, भक्तन की रखहुं छाया।
संकट हरहुं सदा प्रिया, जयति जयति बगलामुखि॥
जयति जयति बगलामुखि, संकट हरहुं सदा दया।
भक्तन की रक्षा करहुं, दुष्ट दलन करहुं छाया॥