गीता 9.23
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 9 · श्लोक 23

गीता 9.23

अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 9.23 श्रीकृष्ण

येऽप्यन्यदेवता भक्ता यजन्ते श्रद्धयाऽन्विताः।
तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम् ॥

हिंदी अर्थहे कुन्तीनन्दन! जो भी भक्त (मनुष्य) श्रद्धापूर्वक अन्य देवताओंका पूजन करते हैं, वे भी करते हैं मेरा ही पूजन, पर करते है अविधिपूर्वक

रोमन में पढ़ें

ye ’pyanya-devatā-bhaktā yajante śhraddhayānvitāḥ
te ’pi mām eva kaunteya yajantyavidhi-pūrvakam

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।