गीता 7.3
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 7 · श्लोक 3

गीता 7.3

अध्याय 7 – ज्ञानविज्ञानयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 7.3 श्रीकृष्ण

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये।
यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः ॥

हिंदी अर्थहजारों मनुष्योंमें कोई एक वास्तविक सिद्धिके लिये यत्न करता है और उन यत्न करनेवाले सिद्धोंमें कोई एक ही मुझे तत्त्वसे जानता है।

रोमन में पढ़ें

manuṣhyāṇāṁ sahasreṣhu kaśhchid yatati siddhaye
yatatām api siddhānāṁ kaśhchin māṁ vetti tattvataḥ

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।