गीता 4.2
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 4 · श्लोक 2

गीता 4.2

अध्याय 4 – ज्ञानकर्मसंन्यासयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 4.2 श्रीकृष्ण

एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः।
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥

हिंदी अर्थहे परंतप ! इस तरह परम्परासे प्राप्त इस कर्मयोग को राजर्षियोंने जाना। परन्तु बहुत समय बीत जानेके कारण वह योग इस मनुष्यलोकमें लुप्तप्राय हो गया।

रोमन में पढ़ें

evaṁ paramparā-prāptam imaṁ rājarṣhayo viduḥ
sa kāleneha mahatā yogo naṣhṭaḥ parantapa

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।