गीता 4.1 श्रीकृष्ण इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्। विवस्वान् मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ॥ हिंदी अर्थमैंने इस अविनाशी योगको सूर्यसे कहा था। फिर सूर्यने (अपने पुत्र) वैवस्वत मनुसे कहा और मनुने (अपने पुत्र) राजा इक्ष्वाकुसे कहा। रोमन में पढ़ें śhrī bhagavān uvācha imaṁ vivasvate yogaṁ proktavān aham avyayam vivasvān manave prāha manur ikṣhvākave ’bravīt