गीता 2.34
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 2 · श्लोक 34

गीता 2.34

अध्याय 2 – सांख्ययोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 2.34 श्रीकृष्ण

अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।
संभावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते ॥

हिंदी अर्थऔर सब प्राणी भी तेरी सदा रहनेवाली अपकीर्तिका कथन अर्थात निंदा करेंगे। वह अपकीर्ति सम्मानित मनुष्यके लिये मृत्युसे भी बढ़कर दुःखदायी होती है।

रोमन में पढ़ें

akīrtiṁ chāpi bhūtāni
kathayiṣhyanti te ’vyayām
sambhāvitasya chākīrtir
maraṇād atirichyate

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।