गीता 18.71
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 18 · श्लोक 71

गीता 18.71

अध्याय 18 – मोक्षसंन्यासयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 18.71 श्रीकृष्ण

श्रद्धावाननसूयश्च शृणुयादपि यो नरः।
सोऽपि मुक्तः शुभाँल्लोकान्प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम् ॥

हिंदी अर्थश्रद्धावान् और दोषदृष्टिसे रहित जो मनुष्य इस गीता-ग्रन्थको सुन भी लेगा, वह भी सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त होकर पुण्यकारियोंके शुभ लोकोंको प्राप्त हो जायगा।

रोमन में पढ़ें

śhraddhāvān anasūyaśh cha śhṛiṇuyād api yo naraḥ
so ‘pi muktaḥ śhubhāl lokān prāpnuyāt puṇya-karmaṇām

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।