गीता 16.22
कुंडलीपंचांग

भगवद्गीता · अध्याय 16 · श्लोक 22

गीता 16.22

अध्याय 16 – दैवासुरसम्पद्विभागयोग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता 16.22 श्रीकृष्ण

एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः।
आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् ॥

हिंदी अर्थहे कुन्तीनन्दन ! इन नरकके तीनों दरवाजोंसे रहित हुआ जो मनुष्य अपने कल्याणका आचरण करता है, वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है।

रोमन में पढ़ें

etair vimuktaḥ kaunteya tamo-dvārais tribhir naraḥ
ācharaty ātmanaḥ śhreyas tato yāti parāṁ gatim

यह श्लोक इन विषयों में

हिंदी अर्थ स्वामी रामसुखदास जी के अनुवाद पर आधारित है। शीर्षक, सरल भावार्थ, मुख्य शब्द और "आज के जीवन में" SachiBhakti की ओर से।