गीता 16.22 श्रीकृष्ण एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः। आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् ॥ हिंदी अर्थहे कुन्तीनन्दन ! इन नरकके तीनों दरवाजोंसे रहित हुआ जो मनुष्य अपने कल्याणका आचरण करता है, वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है। रोमन में पढ़ें etair vimuktaḥ kaunteya tamo-dvārais tribhir naraḥ ācharaty ātmanaḥ śhreyas tato yāti parāṁ gatim